Russia Ukraine War: तकरीबन चार सालों से रूस और युक्रेन के बीच युद्ध जारी है। अब इस युद्ध का असर हरियाणा के युवाओं पर भी पड़ रहा है। रूस में पढ़ाई और रोजगार की तलाश में गए हरियाणा के युवाओं को जबरदस्ती रुसी सेना में भर्ती किया जा रहा है। हाल ही में करनाल के चोरा गांव के नौजवान अंकित कुमार का शव 11 महीनों के बाद रूस से बंद ताबूत में अपने गांव लौटा। शव पहुंचते ही पूरे गांव में दुख का माहौल छा गया।
अध्ययन वीजा पर रूस गया था अंकित
30 वर्षीय युवक अंकित कुमार पिछले साल 30 मार्च 2025 को अध्ययन वीजा पर रूस गया था। परिवार ने किसी तरह 5 लाख रूपये जुटाकर उसे रूस पढ़ने के लिए भेजा था। अंकित ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के बाद विदेशी भाषा में कोर्स करना चाहता था। प्रारंभिक महीनों में वह मास्को में एक होटल में कार्य करते हुए अपनी पढ़ाई भी जारी रखे हुए था।
ट्रेनिंग पूरी हुए बिना युद्ध के मैदान में भेज दिया
एक एजेंट के जरिए अंकित को 26 अगस्त, 2025 को रूस के एवानावा क्षेत्र में सेना में भर्ती किया गया। बिना पूरा प्रशिक्षण दिए ही उसे सीधे युद्ध क्षेत्र में भेज दिया गया। युद्ध के दौरान अंकित की मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि पहले अंकित और साथ के अन्य सैनिकों पर ड्रोन से हमला हुआ, जिसके बाद अंकित को गोलियां मारी गई, जिससे उसकी मौत हो गई।
इकलौते बेटे की मौत से परिजन आहत
रूस में स्थित भारतीय दूतावास के जरिए अंकित की मौत की खबर परिजनों को दी गई। इस घटना ने परिजनों को झकझोर के रख दिया है। बीते कल अंकित का शव गांव में पहुंचा जहां उसके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार किया गया। अंकित अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था और उनका एकमात्र सहारा था। अंकित के पिता सतपाल लंबे समय से अस्वस्थ हैं। डायबिटीज की वजह से डॉक्टर ने उनका एक पैर काट दिया है।
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परिवार के पास सीमित जमीन है आय का कोई संसाधन भी नहीं है। दो बहनों की शादी हो चुकी है। परिवार ने बताया कि 12 अक्टूबर 2025 को आखिरी बार अंकित से बात हुई थी।
हाईलाइट्स
- Russia-Ukraine War का असर हरियाणा के युवाओं तक पहुंचा
- करनाल के चोरा गांव के युवक अंकित कुमार का शव 11 महीने बाद रूस से गांव पहुंचा
- अध्ययन वीजा पर रूस गया था, परिवार ने 5 लाख रुपये जुटाकर भेजा था
- मॉस्को में होटल में काम करते हुए पढ़ाई भी कर रहा था अंकित
- एजेंट के जरिए रूसी सेना में भर्ती, बिना पूरी ट्रेनिंग युद्ध में भेजा गया
- ड्रोन हमले और गोलीबारी में युवक की मौत होने का दावा
- भारतीय दूतावास के जरिए परिजनों को मिली मौत की सूचना
- इकलौते बेटे की मौत से परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
- आर्थिक रूप से कमजोर परिवार, बीमार पिता और सीमित जमीन सहारा






