Crackdown on brick kilns intensified in Haryana: हरियाणा सरकार ने वायु प्रदूषण पर नियंत्रण और पराली जलाने की समस्या कम करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य के गैर-एनसीआर (Non-NCR) जिलों में संचालित सभी ईंट-भट्ठा मालिकों को धान की पराली से बने बायोमास पेलेट (Biomass Pellets) की हर खरीद की जानकारी तुरंत हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) के ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज करनी होगी। इस संबंध में हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) ने गुरुवार को अधिसूचना जारी कर दी। बोर्ड ने ईंट-भट्ठों की निगरानी के लिए एक ऑनलाइन मॉनिटरिंग पोर्टल शुरू किया है, जिस पर सभी भट्ठा संचालकों का पंजीकरण अनिवार्य होगा।
हर महीने देनी होगी ईंधन और उत्पादन की रिपोर्ट
नई व्यवस्था के तहत ईंट-भट्ठा मालिकों को हर महीने ऑनलाइन रिपोर्ट भी जमा करनी होगी। इसमें महीनेभर में तैयार की गई ईंटों की संख्या, कुल ईंधन की खपत, कोयले का उपयोग, पारंपरिक बायोमास और पराली आधारित बायोमास पेलेट की खपत का पूरा विवरण देना होगा। बोर्ड का कहना है कि इस ऑनलाइन प्रणाली से बायोमास पेलेट की खरीद और उपयोग की लगातार निगरानी की जा सकेगी और प्रदूषण नियंत्रण संबंधी नियमों का पारदर्शी तरीके से पालन सुनिश्चित होगा।
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चरणबद्ध तरीके से बढ़ेगा बायोमास पेलेट का इस्तेमाल
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के निर्देशों के अनुसार गैर-एनसीआर जिलों के ईंट-भट्ठों में पराली आधारित बायोमास पेलेट का उपयोग चरणबद्ध तरीके से बढ़ाया जाएगा। इसके तहत 1 नवंबर 2025 से कम से कम 20%, 1 नवंबर 2026 से 30%, 1 नवंबर 2027 से 40% और 1 नवंबर 2028 से 50% तक कोयले के साथ पराली आधारित बायोमास पेलेट का सह-उपयोग (Co-firing) करना अनिवार्य होगा।
खरीद के साथ ही अपलोड करनी होगी पूरी जानकारी
HSPCB के हिसार क्षेत्रीय अधिकारी शक्ति सिंह ने बताया कि सभी ईंट-भट्ठा मालिकों को ऑनलाइन पोर्टल पर पंजीकरण कर प्रत्येक खरीद के तुरंत बाद उसकी जानकारी अपलोड करनी होगी। इसमें खरीद का बिल, सप्लायर का नाम, GST नंबर और बायोमास पेलेट में पराली की घोषित प्रतिशत मात्रा का विवरण देना अनिवार्य होगा।
सात दिन में पालन सुनिश्चित करने के निर्देश
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने गैर-एनसीआर जिलों के सभी क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे सात दिनों के भीतर सभी ईंट-भट्ठा संचालकों को आदेश की प्रति उपलब्ध कराकर उनकी रसीद प्राप्त करें और इसके बाद कार्रवाई रिपोर्ट बोर्ड को भेजें।
प्रदूषण और पराली जलाने पर लगेगी रोक
बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार यह आदेश वायु (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1981 की धारा 31-ए के तहत जारी किया गया है। इसका उद्देश्य ईंट-भट्ठों में पराली आधारित ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना, फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को कम करना और वायु प्रदूषण में कमी लाना है। नई व्यवस्था से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों द्वारा पराली के बेहतर उपयोग को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।





