पंजाब के 38 लाख छात्रों को फायदा होगा, 7,800 निजी स्कूलों के लिए आ रहा है नया कानून

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3.8 million students in Punjab will benefit: पंजाब में रहने वाले 38 लाख से अधिक छात्रों को इसका सीधा लाभ मिलने वाला है। इतना ही नहीं, कर्मचारियों की आउटसोर्सिंग और उन्हें सरकारी ठेकों पर लाने तथा सरकारी सुविधाएं प्रदान करने के संबंध में पंजाब में एक कानून भी बनाया जा रहा है। हाल ही में, पंजाब विधानसभा ने मानसून सत्र के अंतिम दिन सोमवार को दो महत्वपूर्ण विधेयकों को सर्वसम्मति से पारित किया। इनमें आउटसोर्स किए गए कर्मचारियों को सीधे सरकारी ठेकों पर लाने का विधेयक और निजी स्कूलों की फीस वृद्धि पर 5 प्रतिशत की सीमा लगाने का विधेयक शामिल है। 

26,000 से 28,000 आउटसोर्सड कर्मचारियों को सीधे सरकारी अनुबंधों पर लाया जाएगा

वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा पेश किए गए पंजाब राज्य आउटसोर्सड कार्मिक (अनुबंधात्मक नियुक्ति में संक्रमण) विधेयक, 2026 के तहत, पहले चरण में 26,000 से 28,000 आउटसोर्सड कर्मचारियों को सीधे सरकारी अनुबंधों पर लाया जाएगा। इस विधेयक में खतरनाक और गैर-खतरनाक कामों में लगे कर्मचारियों की दो श्रेणियां बनाई गई हैं। खतरनाक काम (जैसे सफाई, सीवरेज और बिजली के खंभों पर काम) करने वाले कर्मचारियों को तीन साल की सेवा के बाद संविदा का दर्जा मिलेगा, जबकि अन्य कर्मचारियों को पांच साल की सेवा के बाद संविदा का दर्जा मिलेगा। कर्मचारियों को भविष्य निधि (पीएफ), ग्रेच्युटी, ईएसआई, मातृत्व अवकाश और 10 दिन का वार्षिक आकस्मिक अवकाश जैसे लाभ मिलेंगे। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि एजेंसियों द्वारा काटा जाने वाला 15-22 प्रतिशत कमीशन अब कर्मचारियों को मिलेगा और आउटसोर्सिंग की पुरानी व्यवस्था समाप्त हो जाएगी।

निजी गैर-सरकारी शिक्षण संस्थान वार्षिक शुल्क में 5 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि नहीं कर सकेगा

दूसरा विधेयक पंजाब गैर-सरकारी शिक्षण संस्थानों के शुल्क विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2026 है, जिसे शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने पेश किया है। इसके तहत, कोई भी निजी गैर-सरकारी शिक्षण संस्थान वार्षिक शुल्क में 5 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि नहीं कर सकेगा। शुल्क में सभी अनिवार्य अंशदान शामिल हैं, जिनमें शिक्षण शुल्क, विकास शुल्क, वार्षिक शुल्क, गतिविधि शुल्क, स्मार्ट क्लास, परिवहन, प्रयोगशाला-पुस्तकालय और परीक्षा शुल्क शामिल हैं।

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इतना ही नहीं, यदि पिछले 3 सालों में वसूला गया शुल्क 15 प्रतिशत से अधिक हो जाता है, तो अतिरिक्त राशि अभिभावकों को वापस करनी होगी। यह कानून राज्य के लगभग 7,800 निजी स्कूलों में पढ़ने वाले 32 लाख छात्रों को राहत प्रदान करेगा। मुख्यमंत्री मान ने दोनों विधेयकों को कर्मचारियों और अभिभावकों के हित में ऐतिहासिक कदम बताया। विपक्ष ने पर्याप्त चर्चा न होने का विरोध जताया, हालांकि दोनों विधेयक भारी बहुमत से पारित हो गए।

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