नेपाल में आयी जानलेवा बाढ़, 8 लोगों की मौत 300 से अधिक लोग हुए लापता, कई भारतीय भी शामिल

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Nepal Floods: बुधवार को तिब्बत सीमा के पास नेपाल के उत्तरी रसुवा जिले में भीषण बाढ़ आने से कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई और 100 से अधिक भारतीय लापता बताए जा रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ में घर, वाहन, पुल और कई बुनियादी ढांचा परियोजना स्थल बह गए। इस स्थिति को देखते हुए नेपाल से सटे बिहार राज्य ने भी बाढ़ का पानी बढ़ने के कारण अलर्ट जारी किया है। 

नेपाल में अचानक आई बाढ़ कहां से शुरू हुई?

अधिकारियों के अनुसार, सुबह लगभग 9 बजे तिब्बती तरफ से भोटे कोशी नदी में अचानक तेज बहाव आ गया, जिससे तिमुरे और स्याप्रू बेसी के इलाके बुरी तरह प्रभावित हुए। ग्यिरोंग सीमा चौकी के पास तिब्बती तरफ भूस्खलन की भी खबर है। चीन के सरकारी समाचार चैनल शिन्हुआ ने घटना के बाद हताहतों और लापता लोगों की सूचना दी है। नेपाल सेना ने प्रभावित क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर और आपदा राहत दल भेजे हैं। सेना ने एक बयान में कहा कि अधिकारी बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने और प्रभावित क्षेत्रों से जानकारी जुटाने का काम कर रहे हैं।

जलविद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचा

उत्तरी नेपाल में आई भीषण बाढ़ से कई सड़कें और बिजली आपूर्ति व्यवस्था क्षतिग्रस्त हो गई है। अधिकारी नुकसान का जायजा लेने में जुटे हैं। नेपाल विद्युत प्राधिकरण (एनईए) ने बताया कि कम से कम छह प्रमुख जलविद्युत और पारेषण संयंत्र क्षतिग्रस्त हुए हैं। इनमें रसुवागढ़ी, चिलिमे, त्रिशुली 3ए, त्रिशुली 3बी हब 220 किलोवाट सबस्टेशन, त्रिशुली जलविद्युत स्टेशन और देवीघाट जलविद्युत स्टेशन शामिल हैं। एनईए ने कहा कि बाढ़ से बिजली उत्पादन, पारेषण और वितरण सुविधाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं, जिससे बिजली आपूर्ति बाधित हो गई है। अधिकारियों ने बताया कि बाढ़ के कारण नेपाल भर के कई राजमार्ग भी बंद कर दिए गए हैं।

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दिल दहला देने वाले नजारे

नेपाल पुलिस और अन्य लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो में तिब्बत सीमा के निकटवर्ती क्षेत्रों में पहाड़ी घाटियों से होकर कीचड़ भरे पानी की तेज़ धाराएं  बहती हुई दिखाई दे रही हैं। नेपाल पुलिस के प्रवक्ता अबी नारायण काफले ने एएफपी को बताया कि अधिकारी अभी भी नुकसान की पूरी जानकारी जुटा रहे हैं। उन्होंने कहा, “हमें नुकसान की सही-सही जानकारी नहीं है, लेकिन बाढ़ बहुत भीषण है और इससे कई बस्तियों को नुकसान पहुँच सकता है।” काफले ने आगे बताया कि नदियों के किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की चेतावनी दी गई है और बचाव एवं राहत कार्यों के लिए सभी उपलब्ध संसाधनों को तैनात कर दिया गया है।

प्रधानमंत्री बालेन शाह की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह ने स्थिति की समीक्षा और राहत कार्यों के समन्वय हेतु राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण की आपातकालीन बैठक बुलाई है। शाह ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “चिकित्सा दल, स्काउट्स और रेड क्रॉस के समन्वय से आवश्यक कदम उठाने का कार्य शुरू हो गया है।” नेपाल और दक्षिण एशिया के अन्य हिस्सों में जून से सितंबर तक मानसून के मौसम में नियमित रूप से बाढ़ और भूस्खलन आते हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि जलवायु परिवर्तन के कारण इस क्षेत्र में चरम मौसम संबंधी घटनाएं अधिक बार और अधिक तीव्र हो रही हैं।

 

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