Viksit Bharat-2047: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंजाब और हरियाणा के उद्योगपतियों से कौशल, प्रौद्योगिकी और व्यापार के क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों के संयुक्त प्रयासों से यह क्षेत्र विनिर्माण, नवाचार और रोजगार का एक सशक्त केंद्र बन सकता है। मुख्यमंत्री बुधवार को पंजाब के पटियाला जिले के दौलतपुर में जीएसए इंडस्ट्रीज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नए औद्योगिक संयंत्र की आधारशिला रखने के समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने जीएसए समूह की औद्योगिक विकास यात्रा की सराहना की।
‘विकसित भारत-2047’: राष्ट्रीय विकास के लिए एक प्रतिबद्धता
कार्यक्रम के विषय ‘विनिर्माण के माध्यम से भारत को सशक्त बनाना’ को प्रेरणादायक बताते हुए उन्होंने कहा कि यह संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत-2047’ के दृष्टिकोण को साकार करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि किसी देश की शक्ति तब बढ़ती है जब उसके कारखानों में उत्पादन बढ़ता है, युवाओं के कौशल में वृद्धि होती है और उसके उत्पाद वैश्विक बाजारों का विश्वास अर्जित करते हैं। मुख्यमंत्री सैनी ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के आह्वान का मूल उद्देश्य देश की क्षमताओं का विकास करना है। युवाओं की प्रतिभा को अवसर प्रदान करना, उद्यमों को नई तकनीक से जोड़ना और भारत में निर्मित उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत का सपना ऐसे ठोस प्रयासों से ही साकार होगा।
पंजाब-हरियाणा संबंधों को मजबूत करना
दोनों राज्यों के बीच मजबूत संबंधों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब और हरियाणा की संस्कृति, कृषि, परिवार और मेहनत की परंपराएं आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं। जब पंजाब में उद्यम बढ़ता है, तो इसके अवसर हरियाणा तक भी पहुंचते हैं। इसी तरह, जब हरियाणा में उद्योग का विस्तार होता है, तो इससे पंजाब के व्यवसायों और युवाओं के लिए अवसर पैदा होते हैं। उन्होंने कहा कि दोनों राज्यों की साझा ताकत पूरे उत्तर भारत की प्रगति को गति दे सकती है।
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विनिर्माण में उत्कृष्टता के लिए एक आह्वान
उन्होंने उद्योगपतियों और विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े कर्मचारियों से उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए सामूहिक संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यहां निर्मित प्रत्येक उत्पाद को उसकी गुणवत्ता के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सराहा जाना चाहिए, जिससे वैश्विक स्तर पर भारत की विश्वसनीयता और विश्वास और मजबूत हो सके।






