हरियाणा सरकार का निवेश अभियान अब वैश्विक स्तर पर

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Happening Haryana Global Investors Summit 2027: सिंगापुर की तकनीक-आधारित अर्थव्यवस्था से लेकर स्वीडन की औद्योगिक विशेषज्ञता तक, हरियाणा सरकार आर्थिक विकास को तेज करने, निवेश आकर्षित करने और रोजगार पैदा करने के लिए वैश्विक साझेदारियों की तलाश कर रही है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की इन दो देशों की यात्राएं – जो उनके कार्यकाल के दो साल पूरे होने से ठीक पहले हुई हैं – मुख्य रूप से तकनीक, विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और लॉजिस्टिक्स पर केंद्रित रहीं।

‘हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल इन्वेस्टर समिट 2027’

यह पहल राज्य के उस व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य ‘हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल इन्वेस्टर समिट 2027’ (जो अगले साल मार्च-अप्रैल में होने की संभावना है) से पहले अपने औद्योगिक आधार का विस्तार करना है। हालांकि ये यात्राएं एक शुरुआत भर हैं, लेकिन आने वाले कुछ महीनों में हरियाणा को एक प्रमुख निवेश गंतव्य के रूप में पेश करने के लिए अन्य देशों और राज्यों की और भी यात्राएं नियोजित की गई हैं।

कामकाज का विस्तार करने की योजना के संकेत

स्वीडन यात्रा का एक प्रमुख परिणाम गुरुग्राम और स्टॉकहोम के बीच प्रस्तावित ‘सिस्टर-सिटी’ (जुड़वां शहर) साझेदारी है। इस पहल का उद्देश्य शहरी नवाचार, निवेश और सतत विकास को बढ़ावा देना है, साथ ही गुरुग्राम की चुनौतियों – जैसे स्वच्छता, जलभराव, परिवहन और ट्रैफिक जाम का समाधान खोजना है। शहरी स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल, जो मुख्यमंत्री के साथ स्वीडन गए थे,उन्होंने बताया कि निवेश आकर्षित करने के उद्देश्य से किसी हरियाणा मुख्यमंत्री की स्वीडन की यह पहली यात्रा थी। स्वीडिश कंपनियों ने राज्य में काफी रुचि दिखाई; कई कंपनियों ने निवेश करने की इच्छा जताई, जबकि पहले से मौजूद निवेशकों ने अपने कामकाज का विस्तार करने की योजना के संकेत दिए।

एक साल के भीतर धरातल पर स्पष्ट बदलाव

गोयल ने कहा कि प्रस्तावित ‘सिस्टर-सिटी’ साझेदारी गुरुग्राम के शहरी बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाने और इसे एक यूरोपीय और आधुनिक (कॉस्मोपॉलिटन) स्वरूप देने में मदद कर सकती है। स्वीडिश सलाहकारों और तकनीकी विशेषज्ञों की एक टीम अगले तीन-चार महीनों में हरियाणा का दौरा कर सकती है। वे शहर की चुनौतियों का अध्ययन करेंगे और तकनीक तथा विशेषज्ञता के आदान-प्रदान के जरिए उनके समाधान तलाशेंगे। मंत्री ने उम्मीद जताई कि इस सहयोग से एक साल के भीतर धरातल पर स्पष्ट बदलाव देखने को मिलेंगे। उद्योग और वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव, अमित अग्रवाल ने बताया कि समिट से पहले घरेलू और वैश्विक निवेश को आकर्षित करने के लिए मुख्यमंत्री ने सिंगापुर में निवेशकों के साथ काफी सार्थक बैठकें कीं। सरकार विभिन्न क्षेत्रों के निवेशकों के सामने अपनी औद्योगिक नीतियों और प्रोत्साहन योजनाओं को पेश कर रही है।

70,000 से 80,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं 

अग्रवाल ने बताया कि राज्य ने सब्सिडी बढ़ाई है, पूंजीगत सब्सिडी (कैपिटल सब्सिडी) शुरू की है, और विभिन्न उद्योगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए MSME नीति के अलावा 10 नई क्षेत्र-विशिष्ट (सेक्टर-स्पेसिफिक) नीतियां तैयार की हैं। हरियाणा ने पांच वर्षों में 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा है और उसे लगभग 2 लाख करोड़ रुपये के पक्के वादे (कमिटमेंट) मिल चुके हैं। उन्होंने बताया कि 70,000 से 80,000 करोड़ रुपये की परियोजनाएं अब क्रियान्वयन (इम्प्लीमेंटेशन) के चरण में पहुंच गई हैं।

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स्थापित और उभरते, दोनों तरह के औद्योगिक क्षेत्रों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ रही है। सिंगापुर दौरे के दौरान 5,500 करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए, जिन्हें अग्रवाल ने पक्के वादे बताया। इससे पहले, निवेश आकर्षित करने के लिए मुख्यमंत्री ने जापान और मुंबई जैसे शहरों का दौरा किया था। सूत्रों के अनुसार, एक प्रतिनिधिमंडल गुजरात के अहमदाबाद और सूरत के दौरे पर है, जबकि अगले तीन महीनों में अन्य यूरोपीय देशों और अमेरिका की यात्रा की भी योजना है।

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