राष्ट्रपति मुर्मू ने महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में हरियाणा की प्रगति की सराहना की, लिंगानुपात में समानता लाने का आह्वान किया

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President Murmu hails Haryana’s progress in women’s empowerment: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रविवार को कहा कि हरियाणा ने महिला सशक्तिकरण के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है और पिछले एक दशक में अपने लिंगानुपात (सेक्स रेशियो) में सुधार दर्ज किया है। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से लिंगानुपात में समानता लाने के लिए मिलकर प्रयास करने का आह्वान किया।

उन्होंने हरियाणा की महिला खिलाड़ियों की सराहना करते हुए कहा कि उचित प्रोत्साहन मिलने से उन्हें देश का नाम रोशन करने में मदद मिली है। राष्ट्रपति मुर्मू राज्य के गठन के 60 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित ‘डायमंड जुबली’ समारोह में शामिल होने के लिए कुरुक्षेत्र पहुंची थीं। इस अवसर पर उन्होंने ‘डायमंड जुबली’ लोगो का अनावरण भी किया। राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय सुरक्षा में हरियाणा के सशस्त्र बल कर्मियों के योगदान और देश के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने में राज्य की भूमिका को भी सराहा।

‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल

समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, “जनवरी 2015 में पानीपत से शुरू किया गया ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहल साबित हुआ है। बेटियों के प्रति लोगों के नजरिए में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। जन्म के समय लिंगानुपात, जो 2014 में प्रति 1,000 लड़कों पर 871 लड़कियां था, नवंबर 2025 तक बढ़कर लगभग 915 हो गया है। मुझे उम्मीद है कि राज्य और केंद्र सरकारों के समन्वित प्रयासों से लिंगानुपात में समानता लाने में मदद मिलेगी और महिलाओं के स्वास्थ्य तथा लड़कियों की शिक्षा में सुधार की गति और तेज होगी।”

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खिलाड़ियों की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा, “हरियाणा के खिलाड़ियों ने ओलंपिक, पैरालंपिक, एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों और विश्व चैंपियनशिप में भारत के खेल इतिहास में असाधारण सफलता हासिल की है।” देश के स्वतंत्रता संग्राम को याद करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, “’भारत छोड़ो आंदोलन’ के दौरान, हरियाणा के ग्रामीण इलाकों के साथ-साथ कस्बों और शहरों के लोगों ने भी पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। यहां तक ​​कि कम उम्र की लड़कियां भी निडर होकर इन आंदोलनों में शामिल होने के लिए आगे आईं। ऐतिहासिक दस्तावेजों में 1930 के ‘सविनय अवज्ञा आंदोलन’ में रेवाड़ी की एक 12 साल की बच्ची की निडर भागीदारी का जिक्र मिलता है।”

बच्ची ने अपने बचपन की पूरी बचत से नमक खरीदा था

 “उस बच्ची ने अपने बचपन की पूरी बचत से नमक खरीदा था।” उन्होंने कई वर्षों तक हर दिन दो पैसे बचाए और पूरी रकम आंदोलन को सौंप दी। उन्होंने कहा, “मैं राज्य सरकार से आग्रह करती हूं कि वह इस प्रेरणादायक घटना के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाए और इसे समाज के सामने लाए।”राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय संस्कृति के विकास में हरियाणा का उल्लेखनीय योगदान रहा है। उन्होंने आगे कहा, “हरियाणा समावेशी विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है। समाज में गहराई तक पैठी कई रूढ़िवादी प्रथाओं को खत्म किया जा रहा है। सर्वांगीण विकास और प्रगतिशील सोच की प्रक्रियाएं एक साथ, तालमेल बिठाकर आगे बढ़नी चाहिए। केंद्र सरकार के साथ बेहतर समन्वय राज्य के विकास को एक नई दिशा दे रहा है।”

हरियाणा ने ‘भारत का पहला विकसित राज्य’ बनने के अगले लक्ष्य के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया 

इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि पिछले छह दशकों में राज्य ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, उन्होंने ‘भारत का पहला विकसित राज्य’ बनने के अगले लक्ष्य के लिए एक मजबूत आधार तैयार किया है। हरियाणा इस संकल्प को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ेगा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत-2047’ के विजन को साकार करने में अग्रणी भूमिका निभाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 1 नवंबर, 1966 को गठन के बाद से हरियाणा में आया बदलाव यहां के लोगों के दृढ़ संकल्प और उद्यमशीलता को दर्शाता है। कभी पिछड़ा क्षेत्र माना जाने वाला यह राज्य, आज किसानों, श्रमिकों, उद्योगपतियों, व्यापारियों, खिलाड़ियों और महिलाओं के निरंतर प्रयासों से भारत के अग्रणी और सबसे तेजी से विकसित होने वाले राज्यों में से एक बन गया है। हरियाणा के राज्यपाल प्रो. असीम कुमार घोष ने कहा कि हरियाणा की असली ताकत इसकी मिट्टी में रचे-बसे उन मूल्यों में है, जो यहां के किसानों की कड़ी मेहनत, सैनिकों के साहस और खिलाड़ियों के अनुशासन में झलकते हैं।

मुर्मू ने स्वतंत्रता संग्राम में रेवाड़ी की 12 वर्षीय बालिका के साहस को याद किया

कुरुक्षेत्र दौरे के दौरान, राष्ट्रपति ने मां भद्रकाली शक्तिपीठ में पूजा-अर्चना की। उन्होंने कुरुक्षेत्र स्थित गुरुकुल के 114वें स्थापना दिवस समारोह और स्वामी श्रद्धानंद के शहादत शताब्दी स्मरण कार्यक्रम में भी भाग लिया। अपने संबोधन के दौरान, राष्ट्रपति ने याद किया कि कैसे रेवाड़ी की एक 12 वर्षीय बालिका ने 1930 के ‘सविनय अवज्ञा आंदोलन’ (Civil Disobedience Movement) में निडर होकर हिस्सा लिया था। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि इस प्रेरणादायक घटना के बारे में विस्तृत जानकारी जुटाई जाए और इसे समाज के सामने लाया जाए।

 

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