हरियाणा ने नशीले पदार्थों से जुड़ी मौतों पर नज़र रखने के लिए नशा-विरोधी नीति शुरू की

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Haryana launches anti-drug policy: पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले नशीले पदार्थों (ड्रग्स) का मुद्दा एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है। इसे देखते हुए हरियाणा ने एक नई नशा-विरोधी नीति शुरू की है। इसके तहत पहली बार एक ऐसा सिस्टम बनाया गया है, जिससे राज्य के सभी 22 जिलों में ड्रग्स से जुड़ी संदिग्ध मौतों को रिकॉर्ड और ट्रैक किया जा सकेगा। साथ ही, 30 दिनों के भीतर हर मामले की जांच करके ड्रग्स सप्लाई करने वाले तक पहुंचा जा सकेगा।

मौतों के आंकड़े जिलेवार जारी किए जाएंगे

अब तक, राज्य में ऐसी मौतों को रिकॉर्ड करने के लिए कोई एक समान सिस्टम नहीं था और पुलिस काफी हद तक परिवारों के दावों पर निर्भर रहती थी। स्वास्थ्य विभाग और पुलिस मिलकर इस नए प्रोटोकॉल को लागू करेंगे। इसके तहत मौतों को तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा: संदिग्ध मौतें, पोस्टमार्टम के आधार पर संभावित मौतें, और फोरेंसिक लैब द्वारा पुष्टि की गई मौतें। मौतों के आंकड़े जिलेवार जारी किए जाएंगे, लेकिन किसी व्यक्ति का नाम नहीं बताया जाएगा। इस नीति को नई बनी ‘संकल्प एंटी-ड्रग सोसाइटी’ (SANKALP Anti-Drug Society) चलाएगी, जिसके प्रमुख मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और पूर्व DGP ओपी सिंह हैं।

सरकारी मैदानों, पार्कों और हॉल में कोच की व्यवस्था की जाएगी

ओपी सिंह ने कहा, “ड्रग्स एक राष्ट्रीय चुनौती है। हालांकि हरियाणा इस समस्या को रोकने में पहले से ही अच्छा काम कर रहा है, लेकिन हम इसे 100 प्रतिशत बेहतर बनाने और राज्य को इस खतरे से पूरी तरह सुरक्षित करने के लिए काम कर रहे हैं।” एक नए कदम के तहत, मार्च 2025 तक जो 4,054 पंचायतें और 859 शहरी वार्ड खुद को ‘नशा-मुक्त’ घोषित करेंगे, उनकी गांव के बाहर से चार स्तरों पर दोबारा जांच (री-वेरिफिकेशन) की जाएगी। इन जांचों में शामिल हैं: अचानक किए गए दौरे में कोई नशा अड्डा न मिलना; ड्रग्स तस्करी में शामिल हर व्यक्ति पर कानूनी कार्रवाई होना; गांव की एक समिति और परिवारों का मिलकर काम करना ताकि मदद मांगने वाले लोगों को इलाज मिल सके; और गांव के खेल के मैदान का नियमित रूप से इस्तेमाल होना। सरकारी मैदानों, पार्कों और हॉल में कोच की व्यवस्था की जाएगी और इन्हें शाम के समय खुला रखा जाएगा।

एंटी-ड्रग टास्क फोर्स में एक केमिकल-ड्रग्स विंग और एक ऑनलाइन सेल शामिल होगा

अगर कोई जगह इन शर्तों को पूरा करने में विफल रहती है, तो उसी महीने उसका ‘नशा-मुक्त’ प्रमाण पत्र वापस ले लिया जाएगा। प्रमाण पत्र दोबारा जारी होने से पहले, उस जगह को लगातार छह महीने तक सभी शर्तों को पूरा करना होगा। ओपी सिंह ने बताया कि इस अभियान में ड्रग्स के धंधे में पैसा लगाने वालों (फाइनेंसरों) को निशाना बनाया जाएगा। जनवरी से सितंबर के बीच, तस्करों की 19.52 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त या फ्रीज की गई है, जबकि पूरे 2025 में यह आंकड़ा 13.59 करोड़ रुपये था। अब ड्रग्स की बड़ी मात्रा (कमर्शियल क्वांटिटी) से जुड़े हर मामले में वित्तीय जांच भी की जाएगी। इसके अलावा, हर पुलिस स्टेशन नशा अड्डों का एक रजिस्टर रखेगा और 30 दिनों के भीतर ऐसे हर अड्डे को बंद कराएगा। दोषसिद्धि दर 2020 के 46.99 प्रतिशत से बढ़कर इस साल 56.56 प्रतिशत हो गई है। हरियाणा में 21 फास्ट-ट्रैक NDPS अदालतें हैं; इनमें से 13 अदालतें जून में स्थापित की गई थीं।

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एंटी-ड्रग टास्क फोर्स में एक केमिकल-ड्रग्स विंग और एक ऑनलाइन सेल शामिल होगा। केमिस्टों की जांच के लिए ‘डिकॉय परचेज’ (नकली ग्राहक बनकर खरीदारी) का तरीका अपनाया जाएगा; पहला सबूत मिलने पर लाइसेंस सस्पेंड कर दिया जाएगा और दूसरी बार सबूत मिलने पर उसे रद्द कर दिया जाएगा। सिंह ने लोगों से अपील की कि वे नशीले पदार्थों की बिक्री के बारे में पुलिस स्टेशन या डिप्टी कमिश्नर को सूचित करें, और भरोसा दिलाया कि उनकी पहचान गुप्त रखी जाएगी।

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