Water-Secure Haryana Programme: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ‘जल सुरक्षित हरियाणा’ कार्यक्रम के संबंध में स्थायी वित्त समिति-सी (एसएफसी) की एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा और सिंचाई एवं जल संसाधन मंत्री श्रुति चौधरी भी उपस्थित रहे।
शनिवार को हुई इस बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व बैंक द्वारा 5,714.80 करोड़ रुपये की ‘जल सुरक्षित हरियाणा कार्यक्रम’ को मंजूरी मिलना, जिसका उद्देश्य राज्य को जल क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है, हरियाणा में जल प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस परियोजना के तहत, राज्य भर में कुल 48.94 लाख एकड़ क्षेत्र में फैले 15 क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि परियोजना की कुल लागत में से 4,000 करोड़ रुपये विश्व बैंक से ऋण के रूप में दिए जाएंगे, जबकि शेष 1,714.80 करोड़ रुपये राज्य निधि से वहन किए जाएंगे।
2026 से 2032 तक 6 सालों में चरणबद्ध तरीके से कार्य किए जाएंगे
विभागीय अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को जानकारी दी कि ‘जल सुरक्षित हरियाणा कार्यक्रम’ एक प्रमुख एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन कार्यक्रम है, जिसके तहत 2026 से 2032 तक 6 सालों में चरणबद्ध तरीके से कार्य किए जाएंगे। इस निधि का उपयोग नहर क्षेत्र में बड़े पैमाने पर कार्यों के लिए किया जाएगा। परियोजना के अंतर्गत, विश्व बैंक की वित्तीय सहायता से 2,484.87 करोड़ रुपये की लागत से 104 नहरों का पुनर्वास किया जाएगा।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि सूक्ष्म सिंचाई एवं कमांड क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एमआईसीएडीए) के माध्यम से 620 जलमार्गों (खालों) का पुनर्वास किया जाएगा, जिससे 3.18 लाख एकड़ भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी। इसके अतिरिक्त, 120 नहर आधारित सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाएं लागू की जाएंगी, जिनसे 56,830 एकड़ भूमि को लाभ होगा। उन्होंने कहा कि राज्य में जलमग्न 2 लाख एकड़ भूमि को भी उपजाऊ बनाया जाएगा। इस परियोजना के तहत 5 लाख एकड़ भूमि पर सीधी बुवाई वाली धान की खेती (डीएसआर) और 1.12 लाख एकड़ भूमि पर फसल विविधता (एमपीएमवी) को बढ़ावा देने के प्रयास किए जाएंगे। टिकाऊ और जल संरक्षण आधारित कृषि को प्रोत्साहित करने के लिए फसल विविधता, डीएसआर और अन्य उपायों को बढ़ावा दिया जाएगा।
131 नए जल निकायों का निर्माण किया जाएगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि भूजल पुनर्भरण को मजबूत करने और भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देने के लिए भिवानी, जिंद, कैथल, महेंद्रगढ़, रेवाड़ी, चरखी दादरी और सिरसा नामक सात जिलों में लगभग 131 नए जल निकायों का निर्माण किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, जींद में स्थित दो, कैथल में एक और गुरुग्राम के धनवापुर में स्थित एक प्रमुख सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से उपचारित जल का पुन: उपयोग किया जाएगा। इन चार एसटीपी से 28,000 एकड़ क्षेत्र को लाभ होगा, जिसकी लागत 282.13 करोड़ रुपये है।
हरियाणा को आत्मनिर्भर बनाने में एक ‘मील का पत्थर’ साबित होगा
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व बैंक ने इस उपलब्धि के लिए सरकार के दूरदर्शी नेतृत्व और मार्गदर्शन की सराहना की है। उन्होंने कहा कि ‘जल सुरक्षित हरियाणा कार्यक्रम’ राज्य के जल प्रबंधन के दृष्टिकोण में एक क्रांतिकारी बदलाव लाएगा। परियोजना पूरी होने पर हरियाणा की सभी नहरों का जीर्णोद्धार किया जाएगा, जिससे राज्य का संपूर्ण नहर नेटवर्क आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित हो सकेगा। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम न केवल जल क्षेत्र में हरियाणा को आत्मनिर्भर बनाने में एक ‘मील का पत्थर’ साबित होगा, बल्कि यह भावी पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित, समावेशी और टिकाऊ जल भविष्य सुनिश्चित करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को भी दर्शाएगा।
मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव राजेश खुल्लर, वित्त एवं योजना विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अरुण गुप्ता, सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अनुराग अग्रवाल, मुख्य अभियंता बीरेंद्र सिंह और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।






