सैनी सरकार के दो साल के कार्यकाल के दौरान चुनाव जीत और चुनौतियों के बीच कल्याणकारी योजनाओं पर जोर

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2 years of Saini govt: मतदाता सूची के ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) को लेकर चल रहे विवाद और विपक्षी दलों के विरोध के बीच, हरियाणा में नायब सिंह सैनी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार  अपने कार्यकाल के दो साल पूरे करने जा रही है। 2024 में कई चुनावी वादों के साथ भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटी थी, लेकिन मुख्यमंत्री के लिए शुरुआती दो साल काफी चुनौतीपूर्ण रहे। इस दौरान कई आंदोलन हुए, दुखद घटनाएं घटीं, एक बैंक घोटाला सामने आया और राजनीतिक टकराव देखने को मिले। इन चुनौतियों के बावजूद, भाजपा ने अपना चुनावी दबदबा बनाए रखा और 2025 तथा 2026 के शहरी स्थानीय निकाय चुनावों में शानदार जीत हासिल की। ​​हालांकि, मार्च 2026 के राज्यसभा चुनाव में भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार बहुत कम अंतर से हार गए, लेकिन कांग्रेस के पांच विधायकों द्वारा कथित तौर पर ‘क्रॉस-वोटिंग’ करने से भाजपा की स्थिति मजबूत हुई और मुख्य विपक्षी दल के भीतर की दरारें सबके सामने आ गईं।

सैनी सरकार ने कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की 

आलोचनाओं का जवाब देने और अपने चुनावी वादों को पूरा करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाने के लिए, सैनी सरकार ने कई कल्याणकारी योजनाएं शुरू की हैं। हरियाणा में 2027 के पंजाब विधानसभा चुनावों का महत्व भी साफ तौर पर दिखा, खासकर राज्य के बाहर सैनी की सक्रियता में। पंजाब के दौरों के दौरान अपनी पंजाबी जड़ों का जिक्र करके और पगड़ी पहनकर, उन्होंने मतदाताओं के साथ भाजपा के जुड़ाव को मजबूत करने की कोशिश की है। सरकार ने हरियाणा में सिख मतदाताओं को लुभाने के लिए प्रमुख सिख हस्तियों की जयंती मनाने और इस समुदाय के लिए कई परियोजनाओं की घोषणा करने का भी प्रयास किया है।

भाजपा एक तात्कालिक विधायी संकट से बचने में सफल रही

जहां तक ​​राजनीतिक विवादों और शासन पर उठने वाले सवालों की बात है, तो दिसंबर 2025 में कांग्रेस द्वारा लाया गया ‘अविश्वास प्रस्ताव’ एक बड़ा विधायी टकराव साबित हुआ। विपक्ष ने सरकार पर चुनावी अनियमितताओं, बिगड़ती कानून-व्यवस्था, वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी वाई. पूरन कुमार की आत्महत्या, राज्य पर बढ़ते कर्ज, भर्ती घोटालों और खेल बुनियादी ढांचे में कमियों का आरोप लगाया। कांग्रेस विधायकों के सदन से वॉकआउट करने के बाद, यह प्रस्ताव ‘वॉयस वोट’ (मौखिक मतदान) के जरिए खारिज हो गया, जिससे भाजपा एक तात्कालिक विधायी संकट से बचने में सफल रही। मार्च 2026 के राज्यसभा चुनावों ने हरियाणा में राजनीतिक मतभेदों को उजागर कर दिया। जहां बीजेपी के संजय भाटिया एक सीट पर निर्विरोध चुने गए, वहीं दूसरी सीट के लिए मुकाबला तब तेज हो गया जब पार्टी ने पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष सतीश नंदल को एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में समर्थन दिया। धांधली के आरोपों के बीच कांग्रेस के करमवीर बौद्ध ने बहुत कम अंतर से जीत हासिल की, जबकि क्रॉस-वोटिंग के संदेह के चलते कांग्रेस के पांच विधायक जांच के दायरे में आ गए।

हरियाणा ने साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और सार्वजनिक सेवाओं में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए ₹738 करोड़ के डिजिटल परिवर्तन अभियान को मंजूरी दी

अगस्त 2026 में अंबाला में सिख प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई झड़प के बाद सरकार को विवादों का सामना करना पड़ा। इस घटना ने हरियाणा में सिखों से जुड़े मुद्दों की राजनीतिक संवेदनशीलता को और बढ़ा दिया, जिससे इस समुदाय के साथ सरकार के जुड़ाव पर ध्यान केंद्रित हुआ। राजनीतिक दांव-पेचों के साथ-साथ, सरकार ने अपनी छवि सुधारने के लिए कल्याणकारी योजनाओं और समुदाय-केंद्रित घोषणाओं का सहारा लिया। इस रणनीति के तहत प्रमुख सिख हस्तियों को याद करने के कार्यक्रम और समुदाय के लिए कई परियोजनाएं शुरू की गईं। सरकार को कई विरोध-प्रदर्शनों का भी सामना करना पड़ा, जिनमें मनीषा की मौत का मामला; हिसार के एक कृषि विश्वविद्यालय में छात्रों का असंतोष; चनाउट गांव में पीने के पानी की पाइपलाइन को लेकर विवाद; रोहतक के PGIMS में आउटसोर्स कर्मचारियों का प्रदर्शन; सफाई कर्मचारियों की 37 दिन तक चली हड़ताल; और MSP तथा व्यापार नीति को लेकर किसानों का आंदोलन शामिल हैं। इस दो साल के कार्यकाल के दौरान कुछ दुखद घटनाएं भी हुईं, जिनमें रोहतक और बहादुरगढ़ में बास्केटबॉल से जुड़ी घटनाएं, ASI संदीप लाथर की आत्महत्या, और फरवरी 2026 में सूरजकुंड मेले में झूला गिरने की घटना शामिल है। इन घटनाओं ने सार्वजनिक सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर चिंताएं पैदा कर दीं।

261 में से 90 वादे पूरे किए गए

2024 के विधानसभा चुनावों में किए गए 261 वादों में से 90 से अधिक वादे पूरे कर लिए गए हैं। ‘दीन दयाल लाडो लक्ष्मी योजना’ लागू की गई है, जिसके तहत पात्र महिलाओं को हर महीने 2,100 रुपये दिए जाते हैं। अन्य प्रमुख वादों में शामिल हैं: तीसरी बार बीजेपी सरकार बनने के बाद 25,000 लोगों को नौकरियां देना; 1.20 लाख कर्मचारियों को नौकरी की सुरक्षा प्रदान करना; जींद में हाइड्रोजन ट्रेन की शुरुआत; किसानों को 48 घंटे के भीतर भुगतान करना; और जिला मुख्यालयों पर मुफ्त डायलिसिस सेवाएं उपलब्ध कराना। कृष्ण बेदी, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री

जनता का भरोसा जीता है

महिपाल ढांडा, शिक्षा मंत्री ने कहा, सरकार ने अपने चुनावी वादों को पूरा किया है और जनता का भरोसा जीता है। सरकार चरणबद्ध तरीके से अपने वादों को पूरा कर रही है और अगले दो वर्षों में सभी वादे पूरे कर दिए जाएंगे। सरकार के कार्यकाल का पांचवां और अंतिम वर्ष, अगले पांच वर्षों की योजनाएं तैयार करने के लिए समर्पित होगा। 

 

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