हरियाणा के ‘विज़न 2047’ रोडमैप में हेरिटेज कॉरिडोर और नए संग्रहालय शामिल

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Haryana’s Vision 2047 roadmap: हरियाणा सरकार ने ‘हरियाणा विजन 2047’ के तहत राज्य की ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखने और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक व्यापक योजना तैयार की है। इस योजना में 21 नई जगहों पर पुरातात्विक खुदाई करना, संरक्षित स्मारकों की संख्या बढ़ाकर 120 से अधिक करना, छह मौजूदा संग्रहालयों का नवीनीकरण करना और छह नए संग्रहालय स्थापित करना शामिल है। इसमें स्वतंत्रता संग्राम और सरस्वती-सिंधु सभ्यता से जुड़ी महत्वपूर्ण जगहों को जोड़ने वाले ‘हेरिटेज कॉरिडोर’ (विरासत गलियारे) बनाने का प्रस्ताव भी है। राखीगढ़ी पर विशेष ध्यान देने के साथ-साथ, सरकार हरियाणा के इतिहास और संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हेरिटेज फेस्टिवल, म्यूजियम वॉक, शोध कार्यों और जनभागीदारी को बढ़ावा देगी।

इस योजना के तहत जिन छह मौजूदा संग्रहालयों का नवीनीकरण किया जाएगा, उनमें गढ़ी सांपला (रोहतक) स्थित दीनबंधु सर छोटू राम संग्रहालय, पानीपत संग्रहालय, हिसार स्थित जहाज कोठी संग्रहालय, जींद स्थित जयंती देवी संग्रहालय, पिंजौर स्थित भीमा देवी मंदिर संग्रहालय और कपाल मोचन स्थित गुरु गोबिंद सिंह मार्शल आर्ट्स संग्रहालय शामिल हैं। इसके अलावा, शहजादपुर की ऐतिहासिक जगह और नारायणगढ़ पुलिस स्टेशन के रेस्ट हाउस को भी इस योजना में शामिल किया जाएगा।

छह नए संग्रहालय बनाने की योजना

साथ ही, छह नए संग्रहालय बनाने की भी योजना है, जिनमें झज्जर स्थित स्वामी ओमानंद संग्रहालय, पंचकूला में एक राज्य संग्रहालय, राखीगढ़ी में एक संग्रहालय, कुरुक्षेत्र में सिख और रविदास संग्रहालय, तथा कुणाल में एक संग्रहालय शामिल हैं। इन पहलों का उद्देश्य हरियाणा की समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना और इसे आम जनता के लिए अधिक सुलभ बनाना है।

‘हरियाणा विजन 2047’ के अंतर्गत पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग की पांच साल की कार्ययोजना की समीक्षा के लिए गुरुवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में एक बैठक हुई। मुख्यमंत्री ने पर्यटन विभाग के कामकाज को और बेहतर बनाने तथा हरियाणा को एक पर्यटन केंद्र (टूरिज्म हब) के रूप में विकसित करने के लिए विस्तृत निर्देश भी दिए।

इस मौके पर मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि राज्य में कई ऐसी ऐतिहासिक जगहें हैं, जो इसके गौरवशाली अतीत और पूर्वजों के संघर्षों को दर्शाती हैं। लोगों को इस समृद्ध विरासत से परिचित कराने के लिए हरियाणा में ऐतिहासिक जगहों को जोड़ने वाला एक नया कॉरिडोर विकसित किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उन बहादुर नायकों की कहानियों के बारे में जान सकें, जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। उन्होंने कहा, “भारत की आज़ादी के लिए हरियाणा के पूर्वजों द्वारा किए गए संघर्ष की कहानियाँ राज्य के कोने-कोने में बिखरी पड़ी हैं। 1857 का पहला स्वतंत्रता संग्राम अंबाला छावनी से शुरू हुआ था, और इस ऐतिहासिक घटना के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए, सरकार ने अंबाला छावनी में एक भव्य और शानदार ‘शहीद स्मारक’ का निर्माण किया है।”

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मुख्यमंत्री ने बताया कि स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ी वे सभी जगहें, जिन्हें इस स्मारक में दर्शाया गया है, आज भी अंबाला और अन्य ज़िलों में मौजूद हैं। इन जगहों को न केवल संरक्षित करने की ज़रूरत है, बल्कि इन्हें एक साथ जोड़कर एक ऐसा कॉरिडोर भी विकसित किया जाना चाहिए, जिससे आम लोग हरियाणा के इतिहास के बारे में जान सकें। उन्होंने अधिकारियों को इस संबंध में एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया।

मंदिर के मूल ढांचे से कोई छेड़छाड़ न हो

मुख्यमंत्री सैनी ने यह भी निर्देश दिया कि राज्य में संरक्षित स्मारकों की संख्या को मौजूदा 72 से बढ़ाकर 2031 तक 120 से अधिक किया जाए। उन्होंने ऐतिहासिक किलों, प्राचीन बावड़ियों, मंदिरों और हवेलियों की पहचान करने, उनका दस्तावेज़ीकरण करने और वैज्ञानिक तरीके से संरक्षण करने पर ज़ोर दिया। उन्होंने यह भी बताया कि कुरुक्षेत्र में ब्रह्म सरोवर के पास एक मंदिर के अंदर महाभारत काल की भाषा में कुछ शिलालेख मौजूद हैं, और उन्हें संरक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि मंदिर के मूल ढांचे से कोई छेड़छाड़ न हो। साथ ही, उन्होंने ब्रिटिश शासन के दौरान बने पुलों और ऐतिहासिक इमारतों को भी संरक्षित करने का निर्देश दिया। मुख्यमंत्री सैनी ने बैठक में कहा, “राखीगढ़ी को एक प्रमुख पुरातात्विक और पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। साथ ही, ‘सरस्वती-सिंधु हेरिटेज कॉरिडोर’ (विरासत गलियारे) की अवधारणा पर भी काम किया जाना चाहिए। प्रस्तावित कॉरिडोर राखीगढ़ी, भरादाना, तिगडाना, बनावली, कुणाल, बालू, भगवानपुरा और खरार अलीपुर जैसे महत्वपूर्ण स्थलों को आपस में जोड़ेगा। कुरुक्षेत्र, अग्रोहा, थानेसर, पिंजौर और अन्य ऐतिहासिक स्थलों की विरासत को भी विशेष महत्व दिया जाएगा।”

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि 2047 के लिए दीर्घकालिक विजन के तहत, हरियाणा के ऐतिहासिक किलों, मंदिरों और स्थापत्य विरासत पर दस्तावेजीकरण और शोध प्रकाशनों को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इसके लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग भी किया जाना चाहिए।

हरियाणा की लगभग 10,000 साल पुरानी विरासत की खोज करना

पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के आयुक्त और सचिव, डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने ‘विजन 2047’ ढांचे के अंतर्गत विभाग की पांच-वर्षीय कार्ययोजना का विवरण प्रस्तुत किया। इस योजना का उद्देश्य राज्य की प्राचीन सभ्यता, ऐतिहासिक खजानों और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना तथा पर्यटन को बढ़ावा देना है।

उन्होंने बताया, “इसका उद्देश्य हरियाणा की लगभग 10,000 साल पुरानी विरासत की खोज करना, उसे संरक्षित करना और बढ़ावा देना है, ताकि राज्य को सांस्कृतिक पर्यटन के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके। इस योजना में पुरातात्विक स्थलों पर वैज्ञानिक खुदाई, ऐतिहासिक विरासत के दस्तावेजीकरण, स्मारकों के संरक्षण और जीर्णोद्धार, संग्रहालयों के आधुनिकीकरण तथा जनभागीदारी बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है।”

अग्रवाल ने बताया कि 1972 से 2025 के बीच राज्य के नौ स्थलों पर पुरातात्विक खुदाई की गई थी। उन्होंने कहा, “विभाग आने वाले वर्षों में 21 नए स्थलों पर खुदाई करने की योजना बना रहा है। पहले चरण में, 2026-27 के दौरान हिसार जिले के सिसवाल में खुदाई की योजना है। इसके बाद दो चरणों में खरार अलीपुर में खुदाई की जाएगी। 2029-31 के दौरान, पुरातात्विक प्राथमिकताओं के आधार पर बालू, जोगना खेड़ा, तिगडाना और राखीगढ़ी में से स्थलों का चयन किया जाएगा।”

 

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