हरियाणा में पटाखों पर प्रतिबंध: NCR में पूरी तरह से रोक, NCR के बाहर के जिलों में केवल ‘ग्रीन पटाखे’ ही मान्य

SHARE:

Haryana firecracker ban: दीवाली से पहले, हरियाणा ने अपने NCR जिलों में पटाखों पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है, जबकि गैर-NCR जिलों में केवल ‘ग्रीन पटाखों’ (पर्यावरण के अनुकूल पटाखों) की अनुमति है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) ने गैर-NCR जिलों के अधिकारियों से इस आदेश को “पूरी सख्ती और भावना के साथ” लागू करने को कहा है, और इसे “अत्यंत जरूरी” निर्देश बताया है।

बोर्ड ने एक पत्र के जरिए, पर्यावरण, वन और वन्यजीव विभाग द्वारा 5 अक्टूबर 2025 को जारी किए गए आदेश को अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह), पुलिस महानिदेशक (DGP), उपायुक्तों, पुलिस प्रमुखों और गैर-NCR जिलों में अपने क्षेत्रीय अधिकारियों को भेज दिया है। गुरुग्राम सहित NCR जिलों में, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 5 के तहत 28 फरवरी 2025 को जारी निर्देशों के अनुसार, सभी प्रकार के पटाखों के निर्माण, भंडारण, बिक्री और उन्हें फोड़ने पर साल भर के लिए प्रतिबंध है। यह प्रतिबंध ऑनलाइन डिलीवरी पर भी लागू होता है। इसमें ‘ग्रीन पटाखों’ को भी कोई छूट नहीं दी गई है।

गैर-NCR जिलों में, ‘लड़ी’ वाले पटाखों (जिन्हें सीरीज क्रैकर्स भी कहा जाता है) के निर्माण, बिक्री और इस्तेमाल पर प्रतिबंध है। इसके अलावा, ‘ग्रीन पटाखों’ को छोड़कर बाकी सभी तरह के पटाखों पर भी रोक है। पटाखों में बेरियम साल्ट (Barium salts) के इस्तेमाल पर पूरे साल प्रतिबंध है। फ्लिपकार्ट (Flipkart) और अमेज़न (Amazon) जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को इन जिलों में ऑनलाइन ऑर्डर लेने या बिक्री पूरी करने से रोक दिया गया है।

‘ग्रीन पटाखों’ के इस्तेमाल के लिए भी समय की पाबंदी है। दीवाली और गुरुपर्व जैसे त्योहारों पर, इन्हें केवल रात 8 बजे से रात 10 बजे के बीच ही फोड़ा जा सकता है। क्रिसमस की पूर्व संध्या और नए साल की पूर्व संध्या पर, इन्हें रात 11:55 बजे से आधी रात 12:30 बजे के बीच फोड़ा जा सकता है। ये आदेश सुप्रीम कोर्ट के 17 जनवरी 2025 के उस निर्देश के बाद आए हैं, जो ‘MC मेहता मामले’ से जुड़ा है। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा और उत्तर प्रदेश से कहा था कि वे दिल्ली की तरह ही पटाखों पर स्थायी प्रतिबंध लगाएं। आदेशों में बताया गया है कि पटाखों से धातु के कण, जहरीले तत्व और हानिकारक रसायन निकलते हैं, जिससे PM2.5 और PM10 का स्तर बढ़ जाता है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पंचकूला में ‘रन फॉर यूनिटी’ को दिखाई हरी झंडी

साथ ही, यह भी कहा गया है कि NCR और उसके आसपास के इलाकों में अक्टूबर से जनवरी के बीच प्रदूषण अपने चरम पर होता है। उपायुक्तों, पुलिस प्रमुखों और HSPCB के क्षेत्रीय अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे इस प्रतिबंध के बारे में लोगों को जागरूक करें और यह सुनिश्चित करें कि नियमों का पालन हो। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 15 के तहत जुर्माना लगाया जा सकता है। हालांकि, पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि समस्या नियमों में नहीं है। प्रदूषण विरोधी कार्यकर्ता रुचिका सेठी ने कहा, “असली ज़रूरत नियमों को लागू करने की है, और हर साल इसी चीज़ की कमी रह जाती है।” उन्होंने आगे कहा, “गुरुग्राम जैसे NCR ज़िलों में तो अभी से ही बिना किसी रोक-टोक के पटाखे फोड़े जा रहे हैं।”

हवा की गुणवत्ता और खराब होने से पहले, ज़िला प्रशासन और पुलिस विक्रेताओं तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ क्या कदम उठाती है, इसी से तय होगा कि इस त्योहार के सीज़न में यह प्रतिबंध कितना प्रभावी रहता है।

Join us on:

Leave a Comment