साइबर अपराध रोकने के लिए हरियाणा के गांव में स्मार्टफोन बैन, पुलिस के सामने 55 मोबाइल तोड़े

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नूंह। हरियाणा के नूंह जिले में साइबर अपराध पर रोक लगाने के लिए एक गांव ने अनोखा और सख्त कदम उठाया है। जिले के सुखपुरी गांव में पंचायत ने स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। इतना ही नहीं, इस फैसले के समर्थन में ग्रामीणों ने पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में 55 स्मार्टफोन सार्वजनिक रूप से तोड़ दिए। सुखपुरी के इस कदम के बाद साइबर अपराध के लिए चिन्हित अन्य 57 गांवों ने भी इसी तरह की कार्रवाई करने का संकल्प लिया है। पंचायतों का मानना है कि स्मार्टफोन के माध्यम से युवा फिशिंग, सेक्सटॉर्शन और ऑनलाइन ठगी जैसे अपराधों की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र की छवि प्रभावित हुई है।

पुलिस की मौजूदगी में तोड़े गए मोबाइल

सुखपुरी गांव में आयोजित कार्यक्रम में ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने एकत्र होकर 55 मोबाइल फोन जमीन पर पटककर नष्ट कर दिए। इस दौरान स्थानीय पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे। ग्रामीणों ने इसे साइबर अपराध के खिलाफ सामूहिक अभियान का हिस्सा बताया। गांव की सरपंच कौसर ने कहा कि स्मार्टफोन युवाओं को गलत रास्ते पर ले जा रहे थे। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधों के कारण गांव की बदनामी बढ़ रही थी, पुलिस की लगातार आवाजाही हो रही थी और सामाजिक स्तर पर भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में पंचायत ने कठोर फैसला लेने का निर्णय किया।

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युवाओं ने जताया विरोध

हालांकि पंचायत के इस फैसले का गांव के युवाओं ने विरोध किया है। उनका कहना है कि स्मार्टफोन आज के समय की जरूरत है और इस तरह का प्रतिबंध विकास की राह में बाधा बन सकता है। स्थानीय सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर यूनुस खान ने कहा कि कुछ लोगों की गलती की सजा पूरे गांव के युवाओं को नहीं दी जा सकती। उनके अनुसार स्मार्टफोन शिक्षा, रोजगार और डिजिटल कारोबार का महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है।

पढ़ाई और रोजगार पर असर की चिंता

युवाओं और छात्रों का कहना है कि स्मार्टफोन पर प्रतिबंध लगने से ऑनलाइन पढ़ाई, छात्रवृत्ति आवेदन, नौकरी के लिए आवेदन और डिजिटल भुगतान जैसी जरूरी सेवाओं तक पहुंच प्रभावित होगी। उनका मानना है कि साइबर अपराध रोकने के लिए जागरूकता और कड़ी कानूनी कार्रवाई जरूरी है, न कि तकनीक से पूरी तरह दूरी बनाना।

कई और गांव भी करेंगे पालन

सुखपुरी के बाद बिछौर, इंदाना, खेरला, पुन्हाना और लोहिंगा खुर्द समेत कई गांवों की पंचायतें भी इसी तरह का कदम उठाने पर विचार कर रही हैं। इससे क्षेत्र में स्मार्टफोन प्रतिबंध को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर पंचायतें इसे साइबर अपराध के खिलाफ जरूरी कदम बता रही हैं, वहीं दूसरी ओर युवा इसे डिजिटल युग में पीछे ले जाने वाला फैसला मान रहे हैं।

 

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