हरियाणा सरकार का बड़ा कदम, बाल संरक्षण और पुनर्वास सेवाओं को किया जाएगा और मजबूत

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Mission Vatsalya: हरियाणा सरकार ने राज्य में बच्चों के संरक्षण, स्वास्थ्य, शिक्षा और पुनर्वास सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए ‘मिशन वात्सल्य’ के तहत कई अहम फैसलों को मंजूरी दी है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता में हुई राज्य स्तरीय निगरानी समिति की बैठक में बच्चों के समग्र विकास से जुड़े कई प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई।

चाइल्ड केयर संस्थानों के बच्चों को मिलेगा आयुष्मान भारत का लाभ

बैठक में फैसला लिया गया कि राज्य के चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूशंस (Child Care Institutions) में रहने वाले सभी पात्र बच्चों के आयुष्मान भारत कार्ड बनाए जाएंगे। इससे बच्चों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं और इलाज के लिए आर्थिक सुरक्षा मिल सकेगी। इसके अलावा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के तहत सभी संस्थानों में हर तीन महीने पर विशेष स्वास्थ्य जांच कराई जाएगी। इसमें दांत, कान-नाक-गला (ENT), त्वचा और अन्य विशेषज्ञ चिकित्सा जांच शामिल होंगी।

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गोद लेने की प्रक्रिया होगी तेज

समिति ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिए कि बच्चों, विशेषकर विशेष जरूरत वाले बच्चों, के मेडिकल एग्जामिनेशन रिपोर्ट (MER) समय पर तैयार की जाए, ताकि गोद लेने (Adoption) की प्रक्रिया में देरी न हो।

शिक्षा और रोजगार पर रहेगा जोर

बच्चों के पुनर्वास को मजबूत बनाने के लिए ऑब्जर्वेशन होम, स्पेशल होम और प्लेस ऑफ सेफ्टी में योग्य शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए स्किल डेवलपमेंट और व्यावसायिक प्रशिक्षण (Vocational Training) का दायरा बढ़ाया जाएगा। वर्तमान में संस्थानों में CCTV रिपेयरिंग और सिलाई जैसे प्रशिक्षण कार्यक्रम पहले से संचालित किए जा रहे हैं।

मानसिक स्वास्थ्य और कानूनी सहायता पर भी फोकस

सरकार ने राज्य के सभी चाइल्ड केयर संस्थानों में मनोवैज्ञानिकों की नियुक्ति के लिए स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ, हरियाणा के साथ सहयोग बढ़ाने का प्रस्ताव भी रखा है। इसके अलावा स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट (SJPU) को और प्रभावी बनाने, प्रशिक्षित चाइल्ड वेलफेयर पुलिस अधिकारियों की निरंतर नियुक्ति सुनिश्चित करने और दूसरे राज्यों व जिलों के बच्चों के परिवारों का पता लगाने की व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। समिति ने POCSO मामलों की बेहतर निगरानी, बच्चों को निःशुल्क कानूनी सहायता और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

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