India’s progress can’t be stopped when every citizen contributes to nation-building: हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को इस बात पर जोर दिया कि नागरिकों को अपने अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को भी समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तब मजबूत होता है जब अधिकार और कर्तव्य साथ-साथ चलते हैं।
‘हम भारत के लोग, हमारा दायित्व’ था
मुख्यमंत्री सैनी ने यह बात यहां ‘पंचनद शोध संस्थान’ द्वारा आयोजित 33वें वार्षिक व्याख्यान-सह-‘लोक मंथन’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। इस कार्यक्रम का विषय ‘हम भारत के लोग, हमारा दायित्व’ था। उन्होंने कहा, “आज जहां नागरिकों के अधिकारों पर काफी चर्चा होती है, वहीं उनके कर्तव्यों और जिम्मेदारियों पर अपेक्षाकृत कम ध्यान दिया जाता है। यह समझना जरूरी है कि हमारे अधिकार क्या हैं, हमारे दायित्व क्या हैं और एक नागरिक के रूप में हमारी जिम्मेदारियां क्या हैं।”
नागरिकों को राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभाने का रास्ता दिखाएंगे
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री सैनी ने कहा कि संविधान में ‘मूल कर्तव्यों’ को शामिल किया गया है, लेकिन लंबे समय तक अधिकारों पर ज्यादा ध्यान दिया गया, जबकि कर्तव्यों पर कम चर्चा हुई। उन्होंने यह भी कहा कि जब हर नागरिक राष्ट्र-निर्माण में अपना योगदान देता है, तो भारत की प्रगति को कोई नहीं रोक सकता। उन्होंने विश्वास जताया कि कार्यक्रम में वक्ताओं द्वारा रखे गए विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक का काम करेंगे और नागरिकों को राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियां निभाने का रास्ता दिखाएंगे।
उन्होंने बताया कि संविधान की प्रस्तावना की शुरुआत इन शब्दों से होती है: ‘हम, भारत के लोग’। उन्होंने कहा, “ये शब्द हमें याद दिलाते हैं कि भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की नींव यहां के लोग हैं। संविधान हमें अधिकार देता है और हमारी स्वतंत्रता तथा गरिमा की रक्षा करता है।” “साथ ही, यह हमसे यह भी अपेक्षा करता है कि हम देश, समाज और एक-दूसरे के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा के साथ निभाएं। अधिकार हमें सशक्त बनाते हैं, जबकि कर्तव्य उस शक्ति को सही दिशा देते हैं। लोकतंत्र तभी मजबूत होता है जब अधिकार और कर्तव्य साथ-साथ चलते हैं।”
संविधान का अनुच्छेद 51A नागरिकों के मूल कर्तव्यों को निर्धारित करता है
मुख्यमंत्री ने बताया कि संविधान का अनुच्छेद 51A नागरिकों के मूल कर्तव्यों को निर्धारित करता है। “इनमें संविधान और उसके आदर्शों का सम्मान करना, स्वतंत्रता संग्राम के मूल्यों को संजोना, देश की एकता और अखंडता की रक्षा करना, सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देना, महिलाओं की गरिमा का सम्मान करना और अपनी साझा सांस्कृतिक विरासत तथा प्रकृति की रक्षा करना शामिल है।” उन्होंने कहा, “ये वे मूल्य हैं जो समाज को एकजुट करते हैं और राष्ट्र को आगे बढ़ने में मदद करते हैं।”
लोकतंत्र में असहमति होना एक स्वाभाविक बात
उन्होंने कहा कि कर्तव्य का पहला रूप संविधान और संस्थाओं का सम्मान करना है। भारतीय लोकतंत्र में अलग-अलग विचार, कई भाषाएं, विभिन्न परंपराएं और कई समुदाय एक साथ आते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “लोकतंत्र में असहमति होना एक स्वाभाविक बात है। हालांकि, विचारों में मतभेद होने के बावजूद बातचीत, मर्यादा और कानून का सम्मान बना रहना चाहिए। हमारे विचार अलग हो सकते हैं, लेकिन राष्ट्रीय हित के लिए हमारा संकल्प एक होना चाहिए।”
देश की विविधता ही इसकी पहचान
उन्होंने कहा कि एक और महत्वपूर्ण जिम्मेदारी समाज में भाईचारे और आपसी सम्मान को मजबूत करना है। भाषा, जाति, धर्म, क्षेत्र या आर्थिक स्थिति के आधार पर कोई भी व्यक्ति छोटा या बड़ा नहीं होता। उन्होंने कहा, “देश की विविधता ही इसकी पहचान है। इसलिए, जब भी हम किसी ऐसे व्यक्ति से मिलें जो किसी अलग धर्म, जाति, क्षेत्र या भाषाई समुदाय से हो, तो हमारे मन में सबसे पहले यही आना चाहिए कि वह व्यक्ति एक भारतीय है और हमारा अपना भाई या बहन है। जब सभी नागरिकों के बीच यह भावना जड़ जमा लेगी, तो भारत एक बहुत बड़ी शक्ति बन जाएगा।”





