Bus fare hike in Haryana: हरियाणा में प्राइवेट बस ऑपरेटर मौजूदा यात्री किराए को लेकर नाखुश हैं। वे किराए में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं और साथ ही इसे ‘कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स’ (उपभोक्ता मूल्य सूचकांक) से जोड़ने की भी मांग कर रहे हैं। ऑपरेटरों का कहना है कि बढ़ती परिचालन लागत (ऑपरेशनल कॉस्ट) और घटती कमाई के कारण, अब बसों को चलाना उनके लिए संभव नहीं रह गया है। ‘स्टेज कैरिज ट्रांसपोर्ट सोसाइटीज’ और ‘प्राइवेट बस ऑपरेटर्स वेलफेयर एसोसिएशन’ ने अपनी लंबे समय से लंबित मांग को मनवाने के लिए बस सेवाएं बंद करने की चेतावनी दी है।
प्राइवेट बस ऑपरेटर किराए में बढ़ोतरी की मांग क्यों कर रहे हैं?
‘स्टेज कैरिज ट्रांसपोर्ट सोसाइटीज’ और ‘प्राइवेट बस ऑपरेटर्स वेलफेयर एसोसिएशन’ ने हरियाणा में यात्री किराए की तुरंत समीक्षा करने की मांग की है। उनका कहना है कि परिचालन लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है। एसोसिएशन ने बताया कि 2020 से किराए में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जबकि इस दौरान डीजल की कीमतें, बीमा प्रीमियम, वेतन, टायर की लागत, स्पेयर पार्ट्स और गाड़ियों के रखरखाव का खर्च लगातार बढ़ता गया है।
ऑपरेटर किस तरह के किराए में बदलाव की मांग कर रहे हैं?
एसोसिएशन ने यात्री किराए को मौजूदा 1 रुपये प्रति किलोमीटर से बढ़ाकर 2 रुपये प्रति किलोमीटर करने की मांग की है। उन्होंने किराए को ‘कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स’ (CPI) से जोड़ने का भी प्रस्ताव दिया है, ताकि समय-समय पर किराए में बदलाव किया जा सके। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. धन सिंह ने कहा कि मौजूदा किराया ढांचा अब व्यावहारिक नहीं रहा, क्योंकि पिछले छह वर्षों में परिचालन खर्च और कमाई के बीच का अंतर काफी बढ़ गया है।
एसोसिएशन का क्या तर्क है?
एसोसिएशन के अनुसार, लंबे समय से किराए में कोई बदलाव न होने के कारण निजी बस ऑपरेटरों के लिए अपना कारोबार चलाना मुश्किल हो गया है। ईंधन, कर्मचारियों के वेतन, बीमा और रखरखाव पर बढ़ता खर्च ऑपरेटरों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाल रहा है, जबकि यात्रियों का किराया जस का तस बना हुआ है। धन सिंह ने बताया कि केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने राज्य सरकारों को सलाह दी थी कि वे समय-समय पर बस किराए की समीक्षा करें, ताकि ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों को भारी नुकसान न उठाना पड़े।
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ऑपरेटरों ने क्या कदम उठाने की चेतावनी दी है?
एसोसिएशन ने राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सरकार किराए में बदलाव नहीं करती है, तो उनके पास लगभग 2,000 बसों की चाबियां और परमिट परिवहन मंत्री को सौंपने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचेगा। ऑपरेटरों का कहना है कि राज्य भर में यात्री सेवाओं में किसी भी तरह की रुकावट को रोकने के लिए सरकार को एक निश्चित समय-सीमा के भीतर फैसला लेना होगा।
एसोसिएशन की अन्य मांगें क्या हैं?
एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और परिवहन मंत्री अनिल विज से आग्रह किया है कि वे निजी बस ऑपरेटरों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक करें और किराए में प्रस्तावित बदलाव पर एक निश्चित समय-सीमा के भीतर फैसला लें। उन्होंने बस स्टैंड शुल्क पर लगने वाले GST और इन शुल्कों में हर साल होने वाली बढ़ोतरी की समीक्षा की भी मांग की है खासकर उन बस स्टैंडों के मामले में, जहां ऑपरेटरों को कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं दी जाती है।
ट्रांसपोर्टरों की चिंताएं क्या हैं?
अंबाला के एक ट्रांसपोर्ट व्यवसायी विवेक चौधरी ने कहा कि सरकार अपनी कल्याणकारी नीतियों के तहत मुफ्त सेवाएं और छूट तो दे रही है, लेकिन यात्रियों का किराया नहीं बढ़ा रही है। जहां सरकार परिवहन विभाग के नुकसान की भरपाई कर देती है, वहीं निजी बस ऑपरेटरों को अपना परिचालन नुकसान खुद ही झेलना पड़ रहा है। निजी बस सेवाओं को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाए रखने और ऐसी स्थिति को टालने के लिए जहां ऑपरेटर बसें चलाने में असमर्थ हो जाएं किराए में बदलाव करना जरूरी है।
यात्रियों पर इसका क्या असर पड़ सकता है?
अगर यह विवाद नहीं सुलझता है और ऑपरेटर अपनी सेवाएं बंद कर देते हैं, तो स्थानीय रूटों पर रोजाना सफर के लिए निजी बसों पर निर्भर यात्रियों को काफी परेशानी हो सकती है। वहीं, अगर किराया बढ़ाया जाता है, तो यात्रियों के लिए सफर करना महंगा हो जाएगा।





