Drug-Free Haryana Campaign: हरियाणा सरकार ने युवाओं को नशीले पदार्थों के सेवन से बचाने और उन्हें स्वस्थ व सकारात्मक जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में चल रहे ‘नशा-मुक्त हरियाणा’ अभियान का विस्तार किया गया है। इसके तहत, फिटनेस और ऊर्जा बढ़ाने के नाम पर इस्तेमाल किए जा रहे युवाओं की सेहत से जुड़े उत्पादों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
इस पहल का उद्देश्य न केवल युवाओं को नशीले पदार्थों से दूर रखना है, बल्कि खेल, फिटनेस और स्वस्थ जीवनशैली को उनकी दिनचर्या का अहम हिस्सा बनाना भी है। इसी उद्देश्य से पूरे राज्य में हर महीने मैराथन आयोजित की जा रही हैं। इस व्यापक पहल के हिस्से के तौर पर, हरियाणा के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (Food and Drug Administration) ने 5 अक्टूबर को राज्य के सभी जिलों में एक साथ विशेष प्रवर्तन अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान, निर्माताओं, वितरकों, खुदरा विक्रेताओं और केमिस्ट की दुकानों सहित कुल 61 प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया। खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30 के तहत न्यूट्रास्युटिकल्स, प्रोटीन पाउडर और एनर्जी ड्रिंक्स के कुल 73 नमूने एकत्र किए गए। इन नमूनों को जांच के लिए चंडीगढ़ और करनाल स्थित राज्य खाद्य प्रयोगशालाओं के साथ-साथ NABL-मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में भेजा गया है।
रोहतक में ‘100% प्राकृतिक’ दावे की जांच शुरू
अभियान के दौरान, रोहतक में ‘मैसर्स द वैरायटी न्यूट्रिशन’ (M/s The Variety Nutrition) के परिसर में ‘नेचुरल प्रोटीन पाउडर’ (कोड: RTK/DO/2025) का स्टॉक मिला। उत्पाद पर ‘100% प्राकृतिक’ होने का बिना किसी प्रमाण के दावा किया गया था। इसके अलावा, लेबल पर एक्सपायरी डेट, निर्माता का पता और FSSAI लाइसेंस नंबर जैसी अनिवार्य जानकारी भी नहीं थी। खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत फर्म के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
नमूने की जांच रिपोर्ट के आधार पर होगी सख्त कार्रवाई
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के आयुक्त ने कहा कि सरकार ने स्पष्ट और सख्त निर्देश जारी किए हैं कि युवाओं की सेहत से समझौता करने वाले किसी भी उत्पाद या व्यावसायिक इकाई को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा कि रोहतक वाले मामले में, प्रोडक्ट पर ‘100% नेचुरल’ होने का दावा किया गया था, जबकि एक्सपायरी डेट, बनाने वाली कंपनी का पता और FSSAI लाइसेंस नंबर जैसी ज़रूरी जानकारी नहीं दी गई थी। ऐसे मामलों में ‘फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट, 2006’ और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने बताया कि अभियान के दौरान लिए गए 73 सैंपल चंडीगढ़ और करनाल की स्टेट फ़ूड लेबोरेटरी और NABL-मान्यता प्राप्त लेबोरेटरी में भेजे गए हैं। आगे की कार्रवाई टेस्ट रिपोर्ट के आधार पर तय की जाएगी। अगर कोई सैंपल असुरक्षित, घटिया क्वालिटी का, गलत लेबलिंग वाला या नियमों के मुताबिक नहीं पाया जाता है, तो संबंधित बनाने वाली कंपनी, डिस्ट्रीब्यूटर या सेलर के खिलाफ तय नियमों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रोडक्ट की क्वालिटी, लेबलिंग, लाइसेंसिंग और बिक्री की जांच के लिए पूरे राज्य में समय-समय पर निरीक्षण के साथ यह एनफोर्समेंट अभियान नियमित रूप से जारी रहेगा।
प्रोडक्ट पर सभी जरूरी जानकारी साफ-साफ दिखाएं
कमिश्नर ने यह भी साफ़ किया कि जो लोग डॉक्टर या डायटीशियन की सलाह के बिना नाबालिग बच्चों, गर्भवती महिलाओं और दूसरे संवेदनशील समूहों को ऐसे प्रोडक्ट बेचते हैं, उनके खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बनाने वाली कंपनियों और सेलर्स से अपील की कि वे अपने प्रोडक्ट पर सभी जरूरी जानकारी साफ़-साफ़ दिखाएं और फ़ूड सेफ़्टी स्टैंडर्ड्स का पूरी तरह पालन करें। हरियाणा सरकार की युवाओं पर केंद्रित इस पहल का उद्देश्य न सिर्फ नशीले पदार्थों के गलत इस्तेमाल के खिलाफ कार्रवाई करना है, बल्कि युवाओं को सेहतमंद विकल्प देना और उन्हें सकारात्मक जीवनशैली की ओर ले जाना भी है। ड्रग्स के खिलाफ जागरूकता अभियानों, खेल गतिविधियों और नियमित मैराथन के साथ-साथ, फ़ूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन की ओर से की जा रही कार्रवाई इस व्यापक कोशिश को और मज़बूत बना रही है।






