सौदा हुआ पक्का! भाजपा और अकाली दल का गठबंधन हुआ तय, आज हो सकती है घोषणा

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Alliance between BJP and Akali Dal finalized: पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के विस्तार की संभावनाएं तेज हो गई हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पंजाब में एनडीए सरकार बनाने के लगातार बयानों के बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) के बीच गठबंधन की बातचीत आगे बढ़ती नजर आ रही है। सूत्रों के अनुसार, दोनों पुराने सहयोगी दलों के बीच सीटों के बंटवारे पर चर्चा चल रही है और दिवाली के बाद गठबंधन की औपचारिक घोषणा की जा सकती है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, इस गठबंधन के तहत भाजपा को 45 से 50 विधानसभा सीटें मिल सकती हैं। हालांकि, भाजपा का आधिकारिक रुख यह है कि वह पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।

अमित शाह के बयानों से गठबंधन वार्ता को गति मिली 

अमित शाह द्वारा पंजाब में एनडीए सरकार बनाने का बार-बार जिक्र करना भाजपा और अकाली दल के बीच वार्ता में सकारात्मक प्रगति का संकेत माना जा रहा है। भाजपा और अकाली दल अतीत में एनडीए के सहयोगी रहे हैं। सितंबर 2020 में, केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल ने एनडीए से संबंध तोड़ लिए थे। अब, दोनों पार्टियों के बीच संभावित गठबंधन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

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अकाली दल के अलग हुए गुट के साथ गठबंधन की संभावना कम 

अमित शाह के एनडीए से संबंधित बयानों के बाद, कुछ हलकों में यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि शायद वे अकाली दल (पुनर्जीवित) गुट का जिक्र कर रहे हों। हालांकि, घटनाक्रम से परिचित लोगों का मानना ​​है कि ऐसा होने की संभावना कम है। बताया गया है कि यह अलग हुआ गुट एक पंजीकृत राजनीतिक दल नहीं है और इसका अपना कोई चुनाव चिन्ह भी नहीं है। इसलिए, इसके नेताओं को भाजपा या अकाली दल के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ना होगा।

प्रधानमंत्री मोदी गठबंधन की घोषणा करने के लिए आ सकते हैं पंजाब

सूत्रों के अनुसार, गठबंधन पर बातचीत पूरी होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं पंजाब का दौरा कर एनडीए गठबंधन की घोषणा कर सकते हैं। हालांकि, इस दौरे या गठबंधन की घोषणा की आधिकारिक तारीख अभी तक घोषित नहीं की गई है। फिलहाल सभी की निगाहें भाजपा और अकाली दल के बीच चल रही सीट बंटवारे की बातचीत पर टिकी हैं। अगर दोनों पार्टियों के बीच समझौता हो जाता है, तो पंजाब की राजनीति में एक बार फिर पुराने सहयोगियों की वापसी देखने को मिल सकती है।

 

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