सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा के कच्चे कर्मचारियों और गेस्ट टीचर्स के भविष्य को लेकर एक बड़ा महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसला लिया है। अशोक कुमार बनाम हरियाणा राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले को बरकार रखा है जिसमें सरकार को कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि जो कर्मचारी सालों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें अनिश्चितकाल तक एडहॉक या अनुबंध पर नहीं रखा जा सकता।
10 साल की सेवा देने पर पक्का होने के हकदार
गुरुवार को सुनाए गए अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जिन कर्मचारियों ने 10 साल या फिर उससे अधिक की निरंतर सेवा कर ली है। नियुक्ति के वक्त वो अपनी सारी अनिवार्य योग्यताएं रखते थे वैसे कर्मचारी पक्का होने के हकदार हैं। कोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया है कि अगर नियमित पद खाली नहीं हैं, तो इन कर्मचारियों को समायोजित करने के लिए ‘अधिसंख्य पद’ (सुपरन्यूमरेरी पोस्ट) सृजित किए जाये।
समकक्ष कर्मचारियों के वेतन के बराबर भुगतान किया जाए
कोर्ट ने सामान काम सामान वेतन सिद्धांत को दोहराते हुए कहा, जब तक नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं होती तब तक इन कर्मचारियों को उनके समकक्ष नियमित कर्मचारियों के न्यूनतम वेतनमान के बराबर भुगतान किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से हरियाणा के हजारों गैस्ट टीचर्स और विभिन्न विभागों में कार्यरत अनुबंध कर्मचारियों की नौकरी जाने का खतरा तकरीबन समाप्त हो गया है।
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समय सीमा के भीतर लागू होगा आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 2011 और उसके बाद की नियमितीकरण नीतियों तहत आने वाले पात्र कर्मचारियों को तुरंत राहत देने को कहा है। कोर्ट ने हरियाणा सरकार को एक निश्चित समय-सीमा के भीतर इस आदेश को लागू करने और पात्र कर्मचारियों की सूची तैयार कर उन्हें नियमित करने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दे दिया है।
हाईलाइट्स
- सुप्रीम कोर्ट का बड़ा और ऐतिहासिक फैसला
- हरियाणा के कच्चे कर्मचारी व गेस्ट टीचर्स को राहत
- अशोक कुमार बनाम हरियाणा सरकार में फैसला बरकरार
- पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश को कायम रखा
- सरकार को कर्मचारियों को पक्का करने का निर्देश
- 10+ साल सेवा वाले कर्मचारी पक्के होने के हकदार
- जरूरी योग्यता रखने वालों को मिलेगा लाभ
- खाली पद न हों तो सुपरन्यूमरेरी पोस्ट बनाने के आदेश
- “समान काम, समान वेतन” सिद्धांत लागू
- नियमित होने तक बराबर वेतन देने का निर्देश
- हजारों कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित
- तय समय सीमा में आदेश लागू करने के निर्देश





