जमीन रजिस्ट्री के साथ अब खुद हो जाएगा म्यूटेशन, हरियाणा सरकार ने शुरू की नई डिजिटल व्यवस्था

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चंडीगढ़: हरियाणा सरकार ने जमीन और संपत्ति से जुड़े कामों को आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को ऑटो म्यूटेशन सिस्टम और पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 की शुरुआत की। नई व्यवस्था लागू होने के बाद संपत्ति की रजिस्ट्री के साथ ही म्यूटेशन की प्रक्रिया स्वतः पूरी हो जाएगी। इस नई प्रणाली के तहत लोगों को अब म्यूटेशन के लिए अलग से आवेदन नहीं करना पड़ेगा। म्यूटेशन से जुड़े दस्तावेज भी ऑनलाइन डाउनलोड किए जा सकेंगे, जिससे सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल सरकारी सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी और सुविधाजनक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने इसे विकसित भारत और विकसित हरियाणा के लक्ष्य को मजबूत करने वाली व्यवस्था बताया।

1-2 साल का इंतजार होगा खत्म

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले लोगों को जमीन म्यूटेशन और अन्य राजस्व सेवाओं के लिए एक से दो साल तक इंतजार करना पड़ता था। इसके अलावा कई बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर भी लगाने पड़ते थे। ऑटो म्यूटेशन और पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 के लागू होने से यह प्रक्रिया काफी तेज और आसान हो जाएगी।

आधार e-KYC होगी अनिवार्य

नई व्यवस्था में आवेदन प्रक्रिया को पहले से अधिक सरल बनाया गया है। पहचान सत्यापन सुनिश्चित करने के लिए खरीदार और विक्रेता दोनों के लिए आधार आधारित e-KYC अनिवार्य होगी। यदि कोई व्यक्ति, कंपनी, संस्था या एनआरआई स्वयं उपस्थित नहीं हो सकता है तो वह अपने प्रतिनिधियों को अधिकृत कर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करा सकेगा।

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ऑनलाइन होगी पूरी निगरानी

नई प्रणाली में भूमि की श्रेणी (प्राइम और नॉन-प्राइम) की पहचान स्वतः हो जाएगी। इसके साथ ही डिजिटल हस्ताक्षर और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की सुविधा भी दी गई है। आवेदक अपने आवेदन की स्थिति ऑनलाइन ट्रैक कर सकेंगे, अतिरिक्त दस्तावेज डिजिटल माध्यम से अपलोड कर सकेंगे और QR कोड के जरिए दस्तावेजों का सत्यापन भी कर पाएंगे।

पासपोर्ट की तरह मिलेगी तत्काल सुविधा

सरकार ने रजिस्ट्री प्रक्रिया में तत्काल अपॉइंटमेंट सुविधा भी शुरू की है, जो पासपोर्ट सेवा की तर्ज पर काम करेगी। वहीं DTP और NOC जैसी विभागीय मंजूरियां भी अब ऑनलाइन दी जाएंगी। सरकार का दावा है कि नई डिजिटल व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी, भ्रष्टाचार की संभावना कम होगी और लोगों को जमीन से जुड़े कामों में तेजी से राहत मिलेगी।

 

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