Young leopard dies in Haryana’s Kalesar forest: हरियाणा के यमुनानगर जिले स्थित कलेसर वन्यजीव अभयारण्य में एक युवा तेंदुए (Young leopard) की मौत से वन विभाग में चिंता बढ़ गई है। गंभीर हालत में मिले इस तेंदुए को बचाने की कोशिश की गई, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पशु चिकित्सकों को आशंका है कि तेंदुआ कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) से संक्रमित हो सकता है। हालांकि, मौत के सही कारण की पुष्टि के लिए नमूनों की जांच जारी है।
ग्रामीणों ने दी थी सूचना
वन अधिकारियों के अनुसार, कलेसर अभयारण्य के पास स्थित शहजादवाला गांव के लोगों ने जंगल के किनारे एक तेंदुए को बीमार और कमजोर हालत में पड़े देखा। ग्रामीणों ने इसकी सूचना वन विभाग को दी, जिसके बाद टीम ने उसे रेस्क्यू कर उपचार के लिए भेजा, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। स्थानीय लोगों का दावा है कि तेंदुआ कई दिनों से इलाके में घूम रहा था और काफी कमजोर दिखाई दे रहा था।
पोस्टमार्टम में क्या मिला?
तेंदुए का पोस्टमार्टम तीन सदस्यीय पशु चिकित्सक दल डॉ. राहुल छछरौली, डॉ. विक्रांत और डॉ. प्रशांत तिवारी ने किया। शुरुआती जांच में तेंदुए के लीवर और हृदय को गंभीर नुकसान, आंतों में रक्तस्राव और श्वसन तंत्र में असामान्यताएं पाई गईं। डॉक्टरों के मुताबिक, ये लक्षण कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) से मेल खाते हैं, लेकिन अंतिम पुष्टि लैब रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
हिसार लैब भेजे गए नमूने
वन विभाग ने तेंदुए के ऊतकों और अन्य नमूनों को विस्तृत जांच के लिए हिसार स्थित प्रयोगशाला भेज दिया है। रिपोर्ट आने के बाद यह पता लगाया जाएगा कि क्या यह संक्रमण अन्य तेंदुओं और वन्यजीवों के लिए भी खतरा बन सकता है।
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एक और तेंदुए की हालत पर नजर
इस घटना से दो दिन पहले रामपुर खदर गांव के पास एक अन्य तेंदुआ भी कमजोर और सुस्त हालत में देखा गया था। इसके बाद वन विभाग ने पूरे इलाके में निगरानी बढ़ा दी है और वन्यजीवों के स्वास्थ्य पर विशेष नजर रखी जा रही है।
8 से 10 महीने का था तेंदुआ
पशुपालन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, मृत तेंदुआ नर था और उसकी उम्र लगभग 8 से 10 महीने के बीच थी। पोस्टमार्टम के बाद वन्यजीव नियमों के तहत उसके शव का अंतिम निपटान किया गया। शव को बसंतौर एलीफेंट रिहैबिलिटेशन सेंटर परिसर में दफनाया गया। करीब 25 हजार एकड़ में फैला कलेसर राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य तेंदुओं की अच्छी-खासी आबादी के लिए जाना जाता है। ऐसे में इस घटना ने वन विभाग की चिंता बढ़ा दी है।





