शामलात जमीन पर रहने वालों को राहत, अब DC करेंगे मालिकाना हक का फैसला

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Haryana Village Shamlat Land (Regulation) Ordinance, 2026: हरियाणा सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में शामलात देह (Shamlat Deh) भूमि पर वर्षों से रह रहे परिवारों को बड़ी राहत देते हुए हरियाणा विलेज शामलात लैंड (रेगुलेशन) अध्यादेश, 2026 (Haryana Village Shamlat Land Regulation Ordinance, 2026) लागू कर दिया है। नई व्यवस्था के तहत अब पात्र लोगों को शामलात जमीन का मालिकाना हक देने का अधिकार संबंधित जिले के डिप्टी कमिश्नर (DC) को होगा। सरकार का मानना है कि इस फैसले से वर्षों से लंबित मामलों का जल्द निपटारा होगा और हजारों ग्रामीण परिवारों को राहत मिलेगी।

अब नहीं लेनी होगी निदेशक की मंजूरी

पहले शामलात देह भूमि पर मालिकाना हक देने के लिए विकास एवं पंचायत विभाग (Development and Panchayat Department)  के निदेशक की मंजूरी जरूरी होती थी। इस प्रक्रिया में बड़ी संख्या में आवेदन विभिन्न स्तरों पर लंबित रह जाते थे, जिससे पात्र लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता था।नई व्यवस्था के तहत अब यह अधिकार सीधे संबंधित जिले के डिप्टी कमिश्नर को सौंप दिया गया है, जिससे मामलों का तेजी से निपटारा हो सकेगा।

इन परिवारों को मिलेगा फायदा

सरकार के अनुसार, 31 मार्च 2004 या उससे पहले शामलात देह भूमि (Shamlat Land) पर मकान बनाकर रह रहे पात्र ग्रामीण परिवार इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। ऐसे हजारों परिवारों को अब अपनी जमीन का मालिकाना हक मिलने का रास्ता आसान हो गया है।

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मुख्यमंत्री की बैठक में लिया गया फैसला

हाल ही में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में हुई बैठक में शामलात भूमि से जुड़े लंबित मामलों की समीक्षा की गई थी। बैठक में पात्र लोगों को जल्द राहत देने और लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण पर जोर दिया गया। इसके बाद सरकार ने अध्यादेश के जरिए अधिकारों का विकेंद्रीकरण करने का फैसला लिया। इस अध्यादेश की अधिसूचना कानून एवं विधायी विभाग की प्रशासनिक सचिव ऋतु गर्ग ने जारी की है।

मीट की दुकानों और स्लॉटर हाउस को भी राहत

हरियाणा सरकार ने इसके साथ ही हरियाणा नगर पालिका (संशोधन) अध्यादेश, 2026 और हरियाणा नगर निगम (संशोधन) अध्यादेश, 2026 को भी मंजूरी दे दी है। इन संशोधनों के तहत अब मीट की दुकानों और स्लॉटर हाउस के लिए नगर निकायों से अलग लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होगी। चूंकि इन व्यवसायों का नियमन पहले से ही हरियाणा फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन द्वारा किया जाता है, इसलिए दोहरी लाइसेंस व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इस फैसले से कारोबारियों के लिए नियमों का पालन आसान होगा, प्रशासनिक बोझ कम होगा और आम लोगों को भी बेहतर सुविधा मिलेगी।

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