Punjab Politics: पंजाब की राजनीति में एक नया राजनीतिक समीकरण उभर रहा है। शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित परिसीमन विधेयक का समर्थन करने की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही पार्टी ने महिला आरक्षण विधेयक को तत्काल लागू करने की मांग भी की है। अकाली दल के इस रुख में बदलाव से पंजाब की राजनीति में हलचल मच गई है और सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या बीजेपी और एसएडी के बीच पुरानी दोस्ती 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले फिर से पटरी पर आ पाएगी?
अकाली दल की यह घोषणा ऐसे समय में आई है जब पार्टी अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी। ठीक एक दिन बाद, सीमांकन के मुद्दे पर केंद्र सरकार के समर्थन में अकाली दल का रुख राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
परिसीमन विधेयक पर शिरोमणि अकाली दल ने क्या कहा?
सुखबीर सिंह बादल ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए पार्टी का रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि अकाली दल निष्पक्ष और समान परिसीमन प्रक्रिया का समर्थन करता है, जिससे सभी राज्यों को समान प्रतिनिधित्व मिले। उन्होंने केंद्र सरकार के सभी राज्यों में सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत की समान वृद्धि के प्रस्ताव का समर्थन किया। बादल ने यह भी कहा कि महिला आरक्षण और परिसीमन दोनों को बिना किसी देरी के लागू किया जाना चाहिए।
अकाली दल का यह रुख इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कुछ महीने पहले इसी विधेयक के खिलाफ पार्टी विपक्ष के साथ खड़ी थी।
पहले विरोध, अब समर्थन… शिरोमणि अकाली दल ने अपना रुख क्यों बदला?
अकाली दल ने परिसीमन विधेयक पर अचानक अपना रुख बदल लिया है। अप्रैल में जब यह विधेयक संसद में पेश किया गया था, तब शिरोमणि अकाली दल ने इसका विरोध किया था। पार्टी को चिंता थी कि प्रस्तावित परिसीमन से पंजाब को पड़ोसी राज्यों की तुलना में अपेक्षाकृत कम लाभ होगा।
उस समय अकाली दल ने विपक्ष के साथ मिलकर इस विधेयक के खिलाफ मतदान किया था। लेकिन अब पार्टी ने कुछ शर्तों के साथ केंद्र के प्रस्ताव का समर्थन किया है। शिरोमणि अकाली दल का कहना है कि अगर सभी राज्यों में सीटों की संख्या में 50 प्रतिशत की समान वृद्धि की जाए, तो वह इस प्रस्ताव के पक्ष में है। यह बदलाव अब पंजाब की राजनीति में सबसे चर्चित मुद्दा बन गया है।
क्या अकाली दल फिर से बीजेपी के साथ हाथ मिलाएगा?
शिरोमणि अकाली दल के रुख में आए बदलाव ने बीजेपी के साथ उसके पुराने संबंधों को लेकर अटकलों को फिर से हवा दे दी है। दशकों पुराना दोनों दलों का गठबंधन 2020 में तीन कृषि कानूनों पर विवाद के बीच टूट गया था। इसके बाद, दोनों पार्टियों ने 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव और 2024 के लोकसभा चुनाव अलग-अलग लड़े।
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2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी पंजाब में एक भी सीट नहीं जीत सकी, जबकि अकाली दल को केवल एक सीट मिली। ऐसे में दोनों पार्टियों के लिए अलग-अलग चुनाव लड़ने का अनुभव खास उत्साहजनक नहीं रहा है। अब 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। ऐसे में अगर बीजेपी और अकाली दल फिर से गठबंधन करते हैं, तो राज्य की चुनावी राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
मोदी-बादल की मुलाकात के बाद अटकलें तेज हो गईं
- अकाली दल की यह ताजा घोषणा सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के एक दिन बाद आई है। इससे राजनीतिक हलकों में दोनों पार्टियों के बीच सुलह की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
- अब, परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण केंद्रीय मुद्दे पर मोदी सरकार के प्रस्ताव को एसएडी का समर्थन इन अटकलों को और भी बल दे रहा है। हालांकि, दोनों पार्टियों द्वारा अभी तक किसी नए गठबंधन की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
- ऐसी स्थिति में, इसे गठबंधन की वापसी का निश्चित संकेत मानना जल्दबाजी होगी, लेकिन राजनीतिक संदेश निश्चित रूप से काफी स्पष्ट प्रतीत होता है।
अकाली का सबसे बड़ा दांव महिला आरक्षण पर भी
अकाली दल ने न केवल परिसीमन विधेयक का समर्थन किया है, बल्कि महिला आरक्षण अधिनियम को तत्काल लागू करने की मांग भी उठाई है। सुखबीर बादल ने कहा कि पार्टी सिख गुरुओं की परंपरा से प्रेरणा लेती है, जिसमें महिलाओं की गरिमा, समानता और समान अधिकारों पर जोर दिया गया है।
उन्होंने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) में महिलाओं के लिए आरक्षण के प्रावधान का उदाहरण भी दिया। एसएडी का कहना है कि देश में महिलाओं के लिए आरक्षण को अब और टाला नहीं जाना चाहिए।
कांग्रेस ने सरकार को चुनौती दी
परिसीमन विधेयक के लिए अकाली दल के समर्थन पर कांग्रेस ने भी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि अगर सरकार के पास ऐसा कोई प्रस्ताव है, तो उसे संसद के समक्ष लाया जाना चाहिए। इससे स्पष्ट है कि परिसीमन का मुद्दा संसद की बहस तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में यह एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है।
क्या पंजाब में राजनीतिक समीकरण बदल रहा है?
- सीमांकन पर एसएडी का नया रुख और सुखबीर बादल की प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात – अगर इन दोनों घटनाओं को एक साथ देखा जाए, तो पंजाब की राजनीति में संभावित नए समीकरणों के लिए जमीन तैयार होती दिख रही है।
- 2027 के विधानसभा चुनाव अभी काफी दूर हैं, लेकिन ये बीजेपी और अकाली दल दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे। अलग-अलग चुनाव लड़ने के बाद दोनों पार्टियों के प्रदर्शन ने निश्चित रूप से यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या पुराने गठबंधन को पुनर्जीवित करना दोनों के लिए लाभकारी सौदा साबित हो सकता है।
- फिलहाल गठबंधन को लेकर कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया है। लेकिन सीमांकन पर एसएडी के बदले रुख और मोदी-बादल की मुलाकात से साफ संकेत मिलता है कि पंजाब की राजनीति में पुरानी दोस्ती की चर्चा फिर से शुरू हो गई है।






