हरियाणा सरकार ने महंगी दवाओं को लेकर अस्पतालों पर सख्ती करना शुरू कर दिया है। सीएम नायाब सिंह सैनी के निर्देश के बाद रोहतक के पीजीआईएमएस में तत्काल प्रभाव से यह नियम लागू कर दिया गया है। आलोचनाओं के बाद पीजीआई ने महंगी दवाओं की खरीद पर सख्ती बढ़ा दी है। अब 1 हजार रूपये प्रति यूनिट से ज्यादा की कीमत पर दवा खरीदने से पहले संबंधित विभागों को इसकी पूरी जानकारी देनी होगी।
महंगी दवाओं पर विशेष निगरानी
हाल ही में जारी हुए सरकार के आदेश के मुताबिक, इससे पहले तमाम विभाग अपनी दवाओं की मांग सीधे खरीद विभाग को भेज देते थे। लेकिन अब इस प्रक्रिया में बदलाव लाया गया है। निदेशक कार्यालय में हुई बैठक में यह तय किया गया है कि संबंधित विभाग को महंगी दवाओं की मांग भेजने से पहले विभागाध्यक्षों को विस्तार से इसकी जानकारी देनी होगी। ये बताना होगा कि दवा क्यों जरूरी है और उसका मरीज पर क्या असर हो रहा है।
महंगी दवाओं की मांग पर देने होंगे इन सवालों के जवाब
केंद्रीय भंडार ने विभागों को स्पष्ट तौर पर कह दिया है कि महंगी दवाओं की मांग से कुछ अहम सवालों के जवाब देने पड़ेंगे। क्या उस दवा का सस्ता विकल्प उपलब्ध है। इससे कितने मरीजों को फायदा होगा। इलाज की सफलता दर क्या है। दवा किसी रिसर्च या फिर प्रोजेक्ट के लिए तो नहीं जा रही है। 1 हजार रुपए से लेकर 76 हजार रुपए प्रति यूनिट तक की कीमत वाली दवाओं की सूची प्रशासन ने विभाग को भेजी है और इसका जवाब भी मांगा है।
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मरीज को समय पर इलाज देने पर जोर
पीजीआईएमएस प्रबंधन ने कहा कि सीमित बजट की वजह से अब दवाओं की खरीद प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी। जिससे जरूरी दवाओं की कमी न हो और मरीजों को समय पर इलाज मिल सके। इस फैसले से अनावश्यक खर्च पर रोक लगेगी और अस्पताल की दवा व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
हाइलाइट्स:
- हरियाणा सरकार ने महंगी दवाओं की खरीद पर सख्त नियम लागू किए
- सीएम नायाब सिंह सैनी के निर्देश के बाद रोहतक PGIMS में तुरंत असर
- 1000 रुपये से अधिक कीमत की दवा खरीदने से पहले देनी होगी पूरी जानकारी
- विभागाध्यक्ष को बताना होगा दवा की जरूरत और मरीज पर प्रभाव
- महंगी दवाओं के लिए सस्ता विकल्प, लाभार्थी मरीज और सफलता दर की जानकारी अनिवार्य
- 1000 से 76,000 रुपये प्रति यूनिट तक की दवाओं पर विशेष निगरानी
- सीमित बजट के कारण प्राथमिकता के आधार पर होगी दवा खरीद
- अनावश्यक खर्च पर लगेगी रोक, मरीजों को समय पर इलाज देने पर जोर





