हरियाणा निकाय चुनाव: हरियाणा में ब्याही दूसरे राज्य की बेटियां नहीं लड़ सकेंगी चुनाव

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हरियाणा निकाय चुनाव की तारीख सामने आते ही आरक्षण की पात्रता को लेकर कानूनी उलझनों पर चुनाव आयोग की ओर से विराम लगा दिया गया है। निकाय और पंचायती चुनावों की नामांकन प्रक्रिया शुरू होते ही आयोग ने स्पष्ट कर दिया है कि अनुसूचित जाति (एससी) और पिछड़ा वर्ग (बीसी) के लिए आरक्षित सीटों पर दूसरे राज्यों की महिलाएं चुनाव नहीं लड़ सकेंगी जिन्होंने हरियाणा में शादी की है। केवल उन्हीं महिलाओं को आरक्षण मिलेगा जो मूल रूप से हरियाणा के निवासी हैं और जिनके पास हरियाणा का वैध जाति प्रमाण पत्र है।

शादी के आधार पर अब नहीं मिल पाएगा कोटा

आमतौर पर देखा जाता है कि पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में जैसे पड़ोसी राज्यों में रहने वाली महिलाएं जो अपने मायके में आरक्षित श्रेणी से आती हैं, वो हरियाणा में इसी कोटे से आरक्षण मांगती हैं। अब चुनाव आयोग की ओर से साफ कर दिया है कि शादी किसी भी मूल जाति या उसके आरक्षण के अधिकार को स्थानांतरित नहीं करता है।

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चुनाव पारदर्शी और नियमों के अनुरूप संपन्न हो

राज्य चुनाव आयुक्त देवेंद्र कल्याण ने सभी रिटर्निंग अधिकारी, सहायक रिटर्निंग अधिकारी तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि नामांकन पत्रों की जांच के दौरान इन दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करें। चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप संपन्न होनी चाहिए।

हाइलाइट्स

  • हरियाणा निकाय चुनाव से पहले आरक्षण पात्रता पर चुनाव आयोग ने स्थिति स्पष्ट की
  • एससी और बीसी आरक्षित सीटों पर दूसरे राज्यों की महिलाएं नहीं लड़ सकेंगी चुनाव
  • केवल हरियाणा की मूल निवासी और वैध जाति प्रमाण पत्र रखने वाली महिलाओं को मिलेगा आरक्षण
  • शादी के आधार पर आरक्षण का लाभ अब नहीं मिलेगा
  • पड़ोसी राज्यों (पंजाब, यूपी, राजस्थान) की महिलाओं पर नियम लागू
  • राज्य चुनाव आयुक्त देवेंद्र कल्याण ने अधिकारियों को जारी किए निर्देश
  • नामांकन पत्रों की जांच में नियमों का सख्ती से पालन करने के आदेश
  • निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने पर आयोग का जोर
vandana
Author: vandana

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