गुरुग्राम में किरायेदारों के साथ बड़ा धोखा, ब्रोकर के खेल में फंसकर 70 हजार रुपये गंवाए

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गुरुग्राम: हरियाणा के गुरुग्राम में तीन कामकाजी युवाओं के साथ कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। मकान मालिक और ब्रोकर के बीच विवाद का खामियाजा इन किरायेदारों को भुगतना पड़ा। उनका आरोप है कि उन्होंने समय पर किराया और सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा किया, लेकिन फिर भी उन्हें फ्लैट खाली करने के लिए मजबूर कर दिया गया। इस पूरी घटना में उनका करीब 70 हजार रुपये का नुकसान हुआ है। यह मामला तब चर्चा में आया जब पीड़ितों में से एक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Reddit के r/Gurgaon फोरम पर अपनी आपबीती साझा की। पोस्ट वायरल होने के बाद बड़ी संख्या में लोगों ने इस पर प्रतिक्रिया दी और कानूनी मदद लेने की सलाह दी।

जनवरी में लिया था फ्लैट, हर महीने समय पर दिया किराया

पोस्ट के मुताबिक, तीनों युवक जनवरी 2026 में गुरुग्राम के DLF क्षेत्र के पास एक फ्लैट में रहने आए थे। फ्लैट उन्हें एक ऐसे व्यक्ति के माध्यम से मिला, जिसने खुद को मकान का मैनेजर बताया था। किरायेदारों ने 50 हजार रुपये सिक्योरिटी डिपॉजिट के रूप में जमा किए और हर महीने करीब 20 हजार रुपये किराया उसी व्यक्ति के खाते में भेजते रहे। किरायेदारों का कहना है कि उन्होंने कभी भी भुगतान में देरी नहीं की और उन्हें इस बात का कोई अंदाजा नहीं था कि उनके पैसे वास्तविक मकान मालिक तक नहीं पहुंच रहे हैं।

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रात में पहुंचा मकान मालिक, कहा- एक हफ्ते में खाली करो घर

करीब एक सप्ताह पहले अचानक रात के समय मकान मालिक फ्लैट पर पहुंच गया। उसने दावा किया कि जिस व्यक्ति को किरायेदार किराया दे रहे थे, उसने कई महीनों का किराया और अन्य बकाया राशि उसे नहीं दी है। यह सुनकर किरायेदार हैरान रह गए। उनका कहना है कि उन्होंने सभी भुगतान समय पर किए थे और उन्हें इस विवाद की कोई जानकारी नहीं थी। मामला इतना बढ़ गया कि पुलिस को भी हस्तक्षेप करना पड़ा। आखिरकार बातचीत के बाद किरायेदारों को सिर्फ एक सप्ताह के भीतर फ्लैट खाली करने का समय दिया गया।

सिक्योरिटी डिपॉजिट भी अटका, बढ़े हुए किराये की मांग

पीड़ितों का आरोप है कि मकान मालिक ने उनका 50 हजार रुपये का सिक्योरिटी डिपॉजिट लौटाने से इनकार कर दिया। साथ ही अगर वे उसी फ्लैट में रहना चाहते हैं तो उनसे नया सिक्योरिटी डिपॉजिट, ज्यादा किराया और कथित बकाया राशि जमा करने की शर्त रखी गई। दूसरी ओर, जिस व्यक्ति को वे अब तक किराया देते रहे, उसने भी पैसे लौटाने से मना कर दिया। उसने कथित तौर पर कहा कि यदि उन्हें शिकायत है तो वे उसके खिलाफ सिविल कोर्ट में मामला दर्ज कर सकते हैं।

70 हजार का नुकसान, सोशल मीडिया पर मांगी मदद

इन घटनाओं के बाद किरायेदारों का दावा है कि उन्हें कुल मिलाकर लगभग 70 हजार रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है। उन्होंने Reddit पर लोगों से सलाह मांगते हुए लिखा कि वे मानसिक रूप से काफी परेशान और थके हुए महसूस कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर लोगों ने दी कानूनी कार्रवाई की सलाह

पोस्ट वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने किरायेदारों का समर्थन किया। लोगों ने उन्हें किराया भुगतान की रसीदें, बैंक ट्रांजेक्शन, रेंट एग्रीमेंट और बातचीत के सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की सलाह दी।

एक यूजर ने लिखा, “अगर आपके पास रेंट एग्रीमेंट है तो मकान मालिक और ब्रोकर दोनों को कानूनी नोटिस भेजिए। ऐसा लगता है कि दोनों मिलकर किरायेदारों को फंसा रहे हैं।”

वहीं, खुद को दिल्ली का वकील बताने वाले एक यूजर ने कहा, “यदि आपने किराया तय व्यक्ति को दिया है तो मकान मालिक और ब्रोकर के बीच का विवाद आप पर नहीं डाला जा सकता। पुलिस शिकायत दर्ज कराइए और जरूरत पड़े तो गुरुग्राम जिला अदालत में सिविल मुकदमा भी दायर कीजिए।”

यह मामला एक बार फिर किराये के मकानों में होने वाली धोखाधड़ी और बिचौलियों की भूमिका पर सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि मकान किराये पर लेने से पहले मालिक की पहचान, प्रॉपर्टी के दस्तावेज और भुगतान की वैध व्यवस्था की पूरी जांच करना बेहद जरूरी है।

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