रोहतक: एमबीबीएस परीक्षा घोटाले में बड़ी कार्रवाई करते हुए Pt BD Sharma University of Health Sciences (यूएचएसआर) ने एक निजी मेडिकल कॉलेज के 20 एमबीबीएस छात्रों को दोबारा निष्कासित कर दिया है। यह फैसला छात्रों को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर देने के बाद लिया गया है, जैसा कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने निर्देश दिया था। विश्वविद्यालय के कुलपति एचके अग्रवाल द्वारा जारी आदेशों में कहा गया है कि संबंधित छात्रों से जुड़े सभी परीक्षा परिणाम रद्द कर दिए गए हैं। साथ ही उन्हें उन परीक्षाओं से जुड़े किसी भी शैक्षणिक लाभ के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है।
विश्वविद्यालय ने यह भी स्पष्ट किया कि घोटाले में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई, दीवानी और आपराधिक मुकदमे शुरू किए जा चुके हैं तथा एफआईआर भी दर्ज कराई गई है। सूत्रों के अनुसार, इसी मेडिकल कॉलेज के तीन अन्य छात्रों के खिलाफ भी कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है, जिन्हें पहले भी कथित रूप से घोटाले में शामिल होने के आरोप में निष्कासित किया गया था।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद हुई दोबारा सुनवाई
विश्वविद्यालय ने 2 फरवरी को 23 एमबीबीएस छात्रों को परीक्षा में हेराफेरी के आरोप में निष्कासित किया था। इसके खिलाफ छात्रों ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिए बिना निष्कासित कर दिया गया, जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया था कि अनुशासन बोर्ड की सिफारिशों और हस्तलेखन विशेषज्ञ की रिपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज उन्हें उपलब्ध नहीं कराए गए। इन दलीलों को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय को सभी संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने और छात्रों को व्यक्तिगत सुनवाई देने के बाद नया फैसला लेने का निर्देश दिया था।
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दोबारा जांच में भी साबित हुई संलिप्तता
हाईकोर्ट के आदेश के बाद विश्वविद्यालय ने मामले की पुनः समीक्षा की, छात्रों को नोटिस जारी किए और उनकी व्यक्तिगत सुनवाई की। कुलपति प्रो. एचके अग्रवाल ने बताया कि अदालत के निर्देशों का पूरी तरह पालन किया गया। सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने और सुनवाई के बाद साक्ष्यों की जांच की गई, जिसमें छात्रों की संलिप्तता दोबारा स्थापित हुई। इसके आधार पर उन्हें फिर से निष्कासित करने का निर्णय लिया गया।
क्या था परीक्षा घोटाला?
जनवरी 2025 में सामने आए इस घोटाले में आरोप है कि विश्वविद्यालय की गोपनीय शाखा से उत्तर पुस्तिकाएं बाहर निकालकर उनमें दोबारा उत्तर लिखे गए और फिर उन्हें जमा कराया गया, ताकि छात्रों को अवैध तरीके से पास कराया जा सके। इस मामले में पिछले वर्ष 24 एमबीबीएस छात्रों सहित कुल 41 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।






