हिसार: चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) ने संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता किया है। इस समझौते का उद्देश्य जलवायु-प्रतिरोधी (climate-resilient) खेती को बढ़ावा देना है, विशेष रूप से धान की डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस (DSR) तकनीक को प्रोत्साहित करना। यह परियोजना Global Environment Facility (GEF-7) Food Systems, Land Use and Restoration Project के तहत संचालित की जाएगी, जिसका फोकस टिकाऊ कृषि, भूमि उपयोग सुधार और पर्यावरण संरक्षण पर है।
क्या है DSR तकनीक?
DSR यानी डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस एक ऐसी तकनीक है जिसमें धान की रोपाई (transplantation) के बजाय सीधे खेत में बीज बोए जाते हैं।इस तकनीक से पानी की खपत कम होती है, श्रम लागत घटती है, खेती की कुल लागत कम आती है और उत्पादन क्षमता बेहतर हो सकती है। HAU के कुलपति प्रो. बीआर कम्बोज ने कहा कि यह तकनीक किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद करेगी।
किसानों को मिलेगा प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता
विश्वविद्यालय के अनुसार इस परियोजना के तहत किसानों को आधुनिक कृषि तकनीक का प्रशिक्षण, फील्ड डेमो (प्रदर्शन प्लॉट्स), तकनीकी मार्गदर्शन और जैविक और पर्यावरण-अनुकूल उपायों की जानकारी प्रदान की जाएगी, ताकि वे नई कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रेरित हो सकें।
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जैविक बीज उपचार पर विशेष जोर
प्रोजेक्ट के नोडल अधिकारी और कॉलेज ऑफ बेसिक साइंसेज एंड ह्यूमैनिटीज के डीन डॉ. राजेश गेरा ने बताया कि जैविक बीज उपचार से मिट्टी की सेहत में सुधार होता है, लाभकारी सूक्ष्मजीव बढ़ते हैं, रासायनिक खादों पर निर्भरता कम होती है और पर्यावरण संतुलन बना रहता है।
FAO और HAU मिलकर करेंगे फील्ड डेमो
HAU और FAO संयुक्त रूप से चयनित क्षेत्रों में प्रदर्शन प्लॉट स्थापित करेंगे। इन प्लॉट्स के जरिए किसानों को DSR तकनीक और आधुनिक खेती के फायदे दिखाए जाएंगे। इससे जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, भूमि की उत्पादकता बढ़ेगी और टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित होगी।
समझौते पर हस्ताक्षर
इस समझौते पर HAU की ओर से डायरेक्टर ऑफ रिसर्च डॉ. रजवीर गर्ग ने हस्ताक्षर किए, जबकि FAO की ओर से टकायुकी हागिवारा ने हस्ताक्षर किए। FAO की एक छह सदस्यीय टीम वर्तमान में विश्वविद्यालय के दौरे पर है और विभिन्न कृषि तकनीकी विषयों पर विस्तृत चर्चा कर रही है।
कृषि क्षेत्र में बड़ा कदम
विशेषज्ञों के अनुसार यह साझेदारी हरियाणा में कृषि को अधिक आधुनिक, टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि राज्य में जल संरक्षण और मिट्टी की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।






