Char Dham Yatra: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से चारधाम यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। आने वाले वर्षों में दिल्ली-एनसीआर से उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र तक का सफर काफी आसान और तेज हो जाएगा। प्रस्तावित नमो भारत (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) के विस्तार और निर्माणाधीन ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के पूरा होने के बाद यात्रा का समय घटकर महज 5 से 6 घंटे रह जाएगा।
7 घंटे तक कम होगा सफर
फिलहाल दिल्ली-एनसीआर से ऋषिकेश और फिर कर्णप्रयाग तक पहुंचने में करीब 11 से 13 घंटे लगते हैं। नई परियोजनाओं के पूरा होने के बाद यही यात्रा लगभग 5 से 6 घंटे में पूरी की जा सकेगी। इससे यात्रियों के करीब 7 घंटे बचेंगे और चारधाम यात्रा पहले से कहीं अधिक सुविधाजनक बन जाएगी।
नमो भारत कॉरिडोर का होगा विस्तार
मेरठ के मोदीपुरम से लक्ष्मण झूला (ऋषिकेश) तक करीब 150 किलोमीटर लंबे नमो भारत कॉरिडोर के विस्तार को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है। यह कॉरिडोर 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली ट्रेनों के लिए डिजाइन किया गया है। इसके जरिए दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद और एनसीआर के अन्य हिस्सों से उत्तराखंड पहुंचना काफी आसान हो जाएगा।
2028 तक पूरी होगी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना उत्तराखंड की सबसे महत्वाकांक्षी रेल परियोजनाओं में से एक है। इस रेल लाइन में 17 सुरंगें और 35 पुल बनाए जा रहे हैं। परियोजना के वर्ष 2028 के अंत तक पूरा होने की उम्मीद है। इस रेल लाइन के शुरू होने के बाद ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक का सफर, जिसमें अभी 5 से 6 घंटे लगते हैं, घटकर सिर्फ 2 से 2.5 घंटे रह जाएगा।
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पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
इन दोनों परियोजनाओं के पूरा होने से चारधाम यात्रा करने वाले लाखों श्रद्धालुओं को बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही उत्तराखंड में पर्यटन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नया प्रोत्साहन मिलेगा।
यात्रा समय में कितना होगा बदलाव?
| रूट | वर्तमान समय | नया अनुमानित समय |
| दिल्ली-एनसीआर से ऋषिकेश | 5-6 घंटे | 2.5-3 घंटे |
| ऋषिकेश से कर्णप्रयाग | 5-6 घंटे | 2-2.5 घंटे |
| कुल यात्रा | 11-13 घंटे | 5-6 घंटे |
नई हाई-स्पीड कनेक्टिविटी परियोजनाओं के पूरा होने के बाद उत्तराखंड की धार्मिक और पर्यटन यात्राएं न केवल तेज होंगी, बल्कि यात्रियों को एक सुरक्षित, आरामदायक और आधुनिक परिवहन सुविधा भी मिल सकेगी।






