Yudh Nashean Virudh: पंजाब के मुख्यमंत्री भंगवत मान ने सोमवार को राज्य के सभी डिप्टी कमिश्नरों (DC), पुलिस कमिश्नरों (CP) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों (SSP) को ‘युद्ध नशे विरुद्ध’ अभियान को और तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पंजाब को पूरी तरह नशा मुक्त बनाने तक इस अभियान में किसी तरह की ढील नहीं दी जाएगी।
नशा तस्करी की कमर तोड़ी गई
गांव रक्षा समितियों (Village Defence Committees) की समीक्षा के लिए आयोजित वर्चुअल बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान के तहत नशे की सप्लाई लाइन को तोड़ दिया गया है और बड़े ड्रग तस्करों को सलाखों के पीछे भेजा गया है। उन्होंने कहा, “नशे के खिलाफ इस मुहिम की रफ्तार को बनाए रखना और इसे और तेज करना समय की जरूरत है, ताकि पंजाब को पूरी तरह नशा मुक्त बनाया जा सके।”
13 हजार से ज्यादा शिकायतें दर्ज
मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले तीन महीनों में गांव रक्षा समितियों के सदस्यों ने ड्रग तस्करों के खिलाफ 13,000 से अधिक शिकायतें दर्ज कराई हैं। जिन जिलों में समितियां कम सक्रिय हैं, वहां लोगों को इस जनहित अभियान में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाएगा। उन्होंने निर्देश दिया कि हर जिले में हर महीने गांव रक्षा समितियों की बैठक आयोजित की जाए और वह खुद राज्य स्तर पर इनकी समीक्षा करेंगे।
1.50 लाख सदस्यों की बनाई गई फोर्स
भगवंत मान ने कहा कि नशे की समस्या वैश्विक है, लेकिन पंजाब में इसके खिलाफ जिस स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है, वह अभूतपूर्व है। उन्होंने बताया कि पंजाब को नशा मुक्त बनाने के लिए 1.50 लाख सदस्यों वाली गांव रक्षा समितियों की एक बड़ी फोर्स तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई को जन आंदोलन बनाना जरूरी है, क्योंकि यह केवल कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि सामाजिक समस्या का भी मुद्दा है।
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पुलिस गांवों में जाकर लोगों से करे संवाद
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पुलिस टीमें नियमित रूप से गांवों का दौरा करें और लोगों से बातचीत कर जमीनी स्थिति का पता लगाएं। उन्होंने यह भी कहा कि ड्रग तस्करों की सूचना देने वाले नागरिकों और गांव रक्षा समिति के सदस्यों की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाए।
नशा मुक्ति केंद्रों की क्षमता बढ़ाई गई
मुख्यमंत्री ने कहा कि नशे की सप्लाई चेन टूटने के बाद बड़ी संख्या में लोग नशा मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों का रुख कर रहे हैं। इसे देखते हुए सरकार ने नशा मुक्ति केंद्रों का बड़ा नेटवर्क तैयार किया है। उन्होंने बताया कि सरकारी नशा मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों में बिस्तरों की संख्या 1,500 से बढ़ाकर 5,000 कर दी गई है। साथ ही नए केंद्र खोले गए हैं और पुराने केंद्रों में सुविधाओं में सुधार किया गया है।
OOAT केंद्रों का भी हुआ विस्तार
मुख्यमंत्री ने बताया कि आउट पेशेंट ओपिओइड असिस्टेड ट्रीटमेंट (OOAT) केंद्रों की संख्या 529 से बढ़ाकर 565 कर दी गई है। उन्होंने अधिकारियों को इन केंद्रों में दवाइयों, उपभोग्य सामग्री और बिस्तरों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
‘सूरमा’ बनेंगे नशा मुक्ति के ब्रांड एंबेसडर
भगवंत मान ने ‘सूरमा’ पहल का जिक्र करते हुए कहा कि जिन लोगों ने नशे की लत छोड़कर दो साल से अधिक समय तक खुद को इससे दूर रखा है, उन्हें ‘रिकवरी एंबेसडर’ बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि ये ‘सूरमा’ अन्य लोगों को नशे से बाहर आने के लिए प्रेरित करेंगे और पंजाब को पूरी तरह नशा मुक्त बनाने में सरकार का सहयोग करेंगे।
जीरो टॉलरेंस नीति पर सरकार अडिग
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने नशे के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई है और पंजाब पुलिस के गौरवशाली इतिहास पर भरोसा जताते हुए कहा कि जनता के सहयोग से पंजाब को जल्द ही पूरी तरह नशा मुक्त बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ इस लड़ाई को जीतने के लिए माइक्रो लेवल पर बेहतर योजना और प्रभावी क्रियान्वयन की जरूरत है, जिसमें हर अधिकारी की सक्रिय भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।






