Insurance Policy के नाम पर करोड़ों की ठगी, गुरुग्राम पुलिस ने आरोपियों को किया गिरफ्तार

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गुरुग्राम: गाजियबाद में फर्जी कॉल सेंटर चलाकर इंश्योरेंस पॉलिसी के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले गिरोह का  गुरुग्राम साइबर पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मानेसर के एक व्यक्ति से ठगी के मामले की जांच करते हुए गाजियाबाद के इंदिरापुरम इलाके में छापामारी की। इस दौरान पुलिस ने तीन आरोपियों को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया। इन्हें तीन दिनों के रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है।

दोगुना मुनाफा का लालच देकर 26 लाख रुपये की ठगी 

मानेसर साइबर पुलिस ने इस पूरे मामले की जानकारी देते हुए बताया कि 21 जनवरी को मानेसर निवासी एक व्यक्ति ने धोखाधड़ी की शिकायत की थी। कहा कि उसके पास एक अंजान नंबर से फोन आया था। फोन करने वाले ने अपने आपको वन सर्वर कैपिटल एडवाइस का प्रतिनिधि बताया। उसने पालिसी बांड खरीदकर दोगुना मुनाफा कमाने का झांसा देकर 26 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए।

26 लाख रुपये लेने के बाद आरोपियों ने अपना फोन स्विच ऑफ कर दिया। केस दर्ज होने के बाद मामले की जांच करते हुए साइबर पुलिस ने मंगलवार को गाजियाबाद के इंदिरापुरम में कार्रवाई की। यहां से तीन आरोपितों उदित चोपड़ा, जितेश कुमार श्रीवास्तव और हिमांशु प्रेमी को पकड़ा गया।

अमीर बनने के चक्कर में खोला फर्जी कॉल सेंटर

पुलिस के द्वारा की गई पूछताछ में  सामने आया कि उदित गाजियाबाद के रायल गार्डन, जितेंद्र आदित्य वर्ल्ड सिटी अपार्टमेंट और हिमांशु अहिंसा खंड दो का रहने वाला है। हिमांशु व जितेश गाजियाबाद में एक इंश्योरेंस कंपनी में काम करते हैं। इन्होंने जल्द अमीर बनने के लालच में इंदिरापुरम में एक कॉल सेंटर बनाया। आरोपी अपनी ही कंपनी से डाटा चोरी कर लोगों के पास कॉल करते थे और इंश्योरेंस पॉलिसी व बांड खरीदने के नाम पर गुमराह करके ठगी की वारदात को अंजाम देते थे। दोनों ने कॉल सेंटर पर कॉल करने के लिए उदित को नौकरी पर रखा था।

जांच में पता चला कि दोनों आरोपी करीब आठ महीनों से कॉल सेंटर संचालित कर रहे थे। इन्होंने करीब दो सौ लोगों को अब तक ठगी का शिकार बनाया। आरोपितों के कब्जे से 13 मोबाइल फोन, सात सिम कार्ड और 50 हजार रुपये की नकदी बरामद की गई। साइबर पुलिस ने बताया कि रिमांड के दौरान इनसे ठगी के राशि के बारे में जानकारी ली जाएगी।

पहले भी चार आरोपियों की हो चुकी है गिरफ्तारी

मानेसर साइबर पुलिस के अनुसार, इन आरोपितों से पहले टीम ने अन्य आरोपितों को भी पकड़ा था। जिनसे इनके बारे में जानकारी मिली थी। व्यक्ति की शिकायत पर जांच के दौरान पता चला था कि राशि जिस बैंक खाते में ट्रांसफर हुई थी, उससे एटीएम व चेक के माध्यम से नकदी निकाली गई।

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