कांग्रेस विधायक दल (CLP) के वरिष्ठ नेता और हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं। पंचकूला के इंडस्ट्रियल एरिया में 14 औद्योगिक प्लॉटों के आवंटन में हुई कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में हरियाणा सरकार ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ सीबीआई को मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है। 2013 में ये आवंटन किए गए थे उस वक्त हुड्डा प्रदेश के मुख्यमंत्री के पद पर थे। सीबीआई ने फरवरी में प्रदेश सरकार से इस संबंध में जांच करने की मंजूरी मांगी थी, जबकि इस मामले में 2016 में एफआईआर दर्ज की गई थी।
इस मामले में हुड्डा के साथ-साथ हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HUDA) के अधिकारियों, जिनमें पूर्व मुख्य वित्त नियंत्रक एससी कंसल और पूर्व उप अधीक्षक बीबी तनेजा शामिल हैं। इनके खिलाफ भी प्रदेश सरकार ने मुकदमा चलाने की मंजूरी दे दी है।
पंचकूला प्लांट आवंटन का क्या है मामला
ये पूरा मामला साल 2013 का है जब भूपेंद्र सिंह हुड्डा हरियाणा के मुख्यमंत्री थे और साथ ही साथ हुड्डा के चेयरमैन भी थे। आरोप है कि पंचकूला में सेक्टर-14 में 14 कीमती औद्योगिक भूखंड अपने पंसदीदा, रिश्तेदारों और करीबियों को कौड़ियों के दाम पर बांटे गए। सीबीआई के द्वारा की गई जांच में सामने आया है कि आवंटन प्रक्रिया के बीच में ही पात्रता के नियमों को बदला गया ताकि खास लोगों को फिट किया जा सके। जांच में पाया गया कि कई ऐसे लोगों को प्लॉट दिए गए जो तकनीकी रूप से इसके हकदार नहीं थे।
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ईडी ने कहा कि रेनू हुड्डा और नंदिता हुड्डा भूपेंद्र सिंह हुड्डा के पैतृक गांव सांघी की रहने वाली थी। कंवर प्रीत सिंह संधू उनके सहपाठी डीडी संधू के बेटे थे। मोना बेरी उनके ओएसडी बलदेव राज बेरी की बहू थी। डॉ. गणेश दत्त रतन उनके साथ टेनिस खेलते थे और प्रदीप कुमार उनके निजी सचिव सिंह राम के बेटे थे।
ईडी का बड़ा दावा
ईडी का दावा है कि आवंटन पाने वाले अशोक वर्मा के ससुर, अशोक काका, कांग्रेस शासन के दौरान एचएएफईडी के अध्यक्ष थे और हुड्डा उन्हें जानते थे। अमन गुप्ता के पिता रमेश गुप्ता थानेसर के पूर्व विधायक थे और हुड्डा से अच्छी तरह परिचित थे। लेफ्टिनेंट कर्नल ओपी दहिया (रिटायर) पूर्व कांग्रेस विधायक करण दलाल के रिश्तेदार हैं। डागर कात्याल के पिता सुनील कात्याल हरियाणा सेवा अधिकार आयोग में आयुक्त रह चुके थे और हुड्डा उन्हें जानते थे। मनजोत कौर न्यायमूर्ति एमएस सुल्लर (रिटायर) की बहू हैं, जो हुड्डा की परिचित थी। सिद्धार्थ भारद्वाज के पिता संजीव भारद्वाज 2004 में एचपीसीसी सचिव थे। उन्होंने 2005 में पार्टी छोड़ दी और 2016 में फिर से पार्टी में शामिल हो गए।
सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान
जांच एजेंसियों का कहना है कि जिस वक्त प्लॉट बांट गए उस वक्त बाजार मूल्य और सर्कल रेट बहुत ज्यादा था। ईडी के द्वारा जारी रिपोर्ट अनुसार, तकरीबन 30.34 करोड़ रुपये की कीमत वाले प्लॉट मात्र 7.85 करोड़ रुपये में बेच दिए गए, जिससे सरकारी खजाने को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा।
हाइलाइट्स:
- पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ CBI को मुकदमा चलाने की मंजूरी
- पंचकूला इंडस्ट्रियल प्लॉट आवंटन मामले में कार्रवाई
- 2013 में 14 औद्योगिक प्लॉट आवंटन में अनियमितताओं का आरोप
- 2016 में दर्ज हुई थी FIR, फरवरी में CBI ने मांगी थी मंजूरी
- HUDA के पूर्व अधिकारियों पर भी केस चलाने की अनुमति
- जांच में पात्रता नियम बदलकर खास लोगों को फायदा देने का आरोप
- कई अपात्र लोगों को प्लॉट आवंटित किए जाने का खुलासा
- ED ने आवंटन पाने वालों के संबंधों को लेकर किए बड़े दावे
- रिश्तेदारों और करीबियों को सस्ते में प्लॉट देने के आरोप
- 30.34 करोड़ के प्लॉट 7.85 करोड़ में देने का दावा
- सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान होने की आशंका






