हरियाणा नगर निगम चुनाव संवैधानिक विवादों में फंस गया है। हरियाणा सरकार के द्वारा सीटों के निर्धारण और आरक्षण 2011 की जनगणना के बजाय परिवार पहचान पत्र के डेटा इस्तेमाल पर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। पूर्व पार्षद उषा रानी समेत कई याचिकाकर्ताओं ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका दायर कर राज्य सरकार की प्रक्रिया को चुनौती दी है।
याचिका में कहा गया है कि कि संविधान के अनुच्छेद 243-पी के अनुसार “जनसंख्या” का अर्थ अंतिम प्रकाशित जनगणना के आंकड़ों से है, लेकिन प्रदेश सरकार ने 2023 और 2024 के संशोधनों के जरिए हरियाणा नगर निगम अधिनियम, 1994 में बदलाव कर एफआईडीआर डेटा को आधार बना लिया।
पंचकूला नगर निगम के वार्ड परिसीमन कठघरे में
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि हरियाणा सरकार का यह कदम न केवल संवैधानिक प्रावधानों के विपरीत है, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पारदर्शिता और निष्पक्षता को भी प्रभावित करता है। इसके साथ ही याचिका में पंचकूला नगर निगम के वार्ड परिसीमन पर भी आरोप है। परिसीमन प्रक्रिया के दौरान प्राप्त आपत्तियों पर विचार किए बिना ही अंतिम अधिसूचना जारी कर दी गई, जो 1994 के नियमों का सीधा उल्लंघन है।
बीसी-ए और बीसी-बी के लिए आरक्षण एक साथ घोषित नहीं
इसके अतिरिक्त वार्डों के निर्धारण में भौगोलिक एकरूपता, संतुलन और जनसंख्या अनुपात जैसे मूल सिद्धांतों की भी अनदेखी की गई। याचिकाकर्ताओं की ओर से 10 अप्रैल 2026 की अधिसूचना को भी चुनौती दी है। आरोप है कि इस अधिसूचना में केवल अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित सीटों की घोषणा की गई थी, जबकि अन्य वर्गों, सामान्य, पिछड़ा वर्ग (बीसी-ए और बीसी-बी) के लिए आरक्षण एक साथ घोषित नहीं किया गया। इस नियम को मनमाना, भेदभावपूर्ण और चुनावी प्रक्रिया के विपरित बताया गया है।
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इसके साथ ही मेयर पद और वार्डों के आरक्षण के लिए चिट्ठी प्रक्रिया (ड्रॉ ऑफ लॉट्स) भी केवल कुछ नगर निगमों में लागू की गई, जबकि नियमों के अनुसार इसे पूरे प्रदेश में एक साथ किया जाना चाहिए था।
चुनावी प्रक्रिया पर रोक लगाने की मांग
याचिकाकर्ताओं की हाईकोर्ट से मांग है कि पंचकूला नगर निगम की सभी सीटों का निर्धारण 2011 की जनगणना के आधार पर किया जाए और जब तक मामले का अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगा दी जाये। आज हाईकोर्ट इस मामले पर सुनवाई करेगा।
हाइलाइट्स:
- हरियाणा नगर निगम चुनाव संवैधानिक विवाद में फंसा
- पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार की प्रक्रिया पर लिया कड़ा संज्ञान
- 2011 जनगणना की बजाय परिवार पहचान पत्र (PPP) डेटा के इस्तेमाल पर उठे सवाल
- अनुच्छेद 243-पी के उल्लंघन का आरोप
- पूर्व पार्षद उषा रानी समेत कई याचिकाकर्ताओं ने दायर की याचिका
- पंचकूला नगर निगम के वार्ड परिसीमन पर भी सवाल
- SC के लिए आरक्षण घोषित, लेकिन BC-A और BC-B के लिए एक साथ नहीं
- आरक्षण प्रक्रिया को मनमाना और भेदभावपूर्ण बताया गया
- चुनाव प्रक्रिया पर रोक लगाने की हाईकोर्ट से मांग
- आज मामले पर होगी सुनवाई





