155 करोड़ बैंक घोटाला में AAP नेता दीपक सिंगला से जुड़े 11 ठिकानों पर ED की छापेमारी

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चंडीगढ़: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को 155.21 करोड़ रुपये के बैंक घोटाले की जांच के सिलसिले में बड़ी कार्रवाई करते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता दीपक सिंगला और उनके सहयोगियों से जुड़े 11 ठिकानों पर छापेमारी की। यह कार्रवाई करनाल, दिल्ली और गोवा में की गई। ED की यह जांच कंपनी महेश टिंबर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े कथित बैंक धोखाधड़ी मामले में चल रही है। यह मामला केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की एफआईआर पर आधारित है, जिसमें कंपनी, उसके निदेशकों और अन्य लोगों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आरोप लगाए गए हैं।

फर्जी दस्तावेजों के जरिए बैंकों को लगाया करोड़ों का चूना

ED के अनुसार, AAP के गोवा प्रभारी दीपक सिंगला, उनके भाई रमन सिंघल और मामा अशोक कुमार मित्तल ने भारत और सिंगापुर में कई आपस में जुड़ी कंपनियों का नेटवर्क बनाकर कथित रूप से फर्जी लेन-देन को अंजाम दिया। जांच एजेंसी का आरोप है कि विदेशी लेटर ऑफ क्रेडिट (FLC) खुलवाने और उसकी सीमा बढ़वाने के लिए फर्जी बिल ऑफ लेडिंग, बिल ऑफ एंट्री, कॉन्ट्रैक्ट और अन्य व्यापारिक दस्तावेज तैयार कर बैंकों में जमा किए गए। ED ने कहा कि जांच में यह स्पष्ट हो चुका है कि बैंकों को सौंपे गए अधिकांश दस्तावेज पूरी तरह फर्जी और मनगढ़ंत थे तथा जिन लकड़ियों (Timber) के आयात का दावा किया गया, उनका वास्तव में कोई आयात हुआ ही नहीं था।

21 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 173 करोड़ रुपए तक पहुंचाया गया लेटर ऑफ क्रेडिट

जांच में सामने आया है कि महेश टिंबर प्राइवेट लिमिटेड के लिए शुरू में करीब 21.48 करोड़ रुपए के विदेशी लेटर ऑफ क्रेडिट खोले गए थे। बाद में इन्हें कथित रूप से बढ़ाकर 173.04 करोड़ रुपए तक पहुंचा दिया गया। इस मामले में ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (अब पंजाब नेशनल बैंक में विलय) की करनाल शाखा के पूर्व वरिष्ठ प्रबंधक सुरेंद्र कुमार रंगा ने ED को दिए बयान में बताया था कि अशोक मित्तल ने उनसे लेटर ऑफ क्रेडिट की सीमा असीमित करने का मौखिक अनुरोध किया था। बदले में उन्हें सिंगापुर में बसाने का कथित आश्वासन भी दिया गया था।

दीपक सिंगला और उनके भाई की कंपनियां भी जांच के घेरे में

ED के मुताबिक, दीपक सिंगला अपने भाई हरीश सिंगला के साथ ट्रैफिक मीडिया इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक थे। यह कंपनी महेश टिंबर से लकड़ी खरीदती थी। वहीं दीपक सिंगला के भाई रमन सिंघल सिंगापुर स्थित अमेजन एक्सपोर्ट पीटीई लिमिटेड (AEPL) में निदेशक थे, जो कथित रूप से महेश टिंबर को लकड़ी और उससे जुड़े उत्पादों की आपूर्ति करती थी।

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आयात के दावों पर उठे सवाल

ED ने अदालत को बताया कि महेश टिंबर के खातों और लेजर रिकॉर्ड की जांच में ट्रैफिक मीडिया द्वारा लंबे समय तक “टिंबर” और “इम्पोर्टेड टिंबर” की खरीदारी दर्ज मिली है। हालांकि CBI और केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) की जांच में यह सामने आया कि आयात से जुड़े अधिकांश बिल ऑफ एंट्री, बिल ऑफ लेडिंग और अन्य दस्तावेज फर्जी थे। जांच एजेंसियों का दावा है कि जिन लकड़ियों को आयातित बताकर बेचा गया, उनका वास्तविक आयात हुआ ही नहीं था।

जांच जारी

ED फिलहाल मामले में धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के पहलुओं की जांच कर रही है। छापेमारी के दौरान बरामद दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों की जांच की जा रही है। एजेंसी का मानना है कि यह पूरा मामला बैंकिंग प्रणाली के साथ बड़े स्तर पर धोखाधड़ी और फर्जी आयात दस्तावेजों के इस्तेमाल से जुड़ा है।

 

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