गुरुग्राम: हरियाणा के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने कफ सिरप की बिक्री को लेकर फैली गलतफहमी पर स्पष्टीकरण जारी किया है। विभाग ने गुरुग्राम के केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स एसोसिएशन (GCDA) को बताया है कि ड्रग्स रूल्स, 1945 की अनुसूची K में हालिया संशोधन के बाद भी सभी कफ सिरप को प्रिस्क्रिप्शन वाली दवा नहीं माना जाएगा।
“सिरप” शब्द को अनुसूची K से हटाया गया
FDA ने साफ किया है कि दवाओं की बिक्री उनके तय वर्गीकरण, संरचना और लेबलिंग नियमों के अनुसार ही जारी रहेगी। संशोधन के तहत “सिरप” शब्द को अनुसूची K से हटाया गया है, जिससे केवल उन विशेष छूटों पर असर पड़ा है जो पहले सीमित लाइसेंसधारियों को दी जाती थीं। विभाग के अनुसार, पहले कुछ प्रतिबंधित लाइसेंस धारक कम आबादी वाले क्षेत्रों में सीमित शर्तों के तहत कुछ सिरप दवाएं बेच सकते थे, लेकिन अब यह छूट समाप्त कर दी गई है। हालांकि इससे दवाओं की श्रेणी में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है।
कफ सिरप की कानूनी श्रेणी में कोई बदलाव नहीं
FDA ने स्पष्ट किया कि कफ सिरप की कानूनी श्रेणी में कोई बदलाव नहीं किया गया है और न ही इन्हें स्वतः Schedule H, H1 या X के तहत शामिल किया गया है। जिन दवाओं पर पहले से इन श्रेणियों के नियम लागू हैं, उन पर पहले की तरह प्रिस्क्रिप्शन और अन्य नियम लागू रहेंगे।
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हर दवा की बिक्री पर बिल देना अनिवार्य
अधिकारियों ने बताया कि गुरुग्राम में इस बदलाव का कोई बड़ा व्यावहारिक असर नहीं होगा क्योंकि यहां पहले से ही प्रतिबंधित फार्मेसी व्यवस्था लागू नहीं है। GCDA के अध्यक्ष ने भी केमिस्टों से घबराने की बजाय नियमों का पालन करने की अपील की है और कहा है कि हर दवा की बिक्री पर बिल देना अनिवार्य है। FDA ने अपने फील्ड अधिकारियों को भी निर्देश दिया है कि वे नियमित निरीक्षण के जरिए दवा दुकानों पर निगरानी बनाए रखें ताकि नियमों का सही तरीके से पालन सुनिश्चित हो सके।






