हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की बड़ी कार्रवाही, पानीपत में 132 अवैध ब्लीचिंग यूनिट्स हुए सील

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Illegal bleaching units sealed in Panipat: पानीपत में हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (HSPCB) ने 132 अवैध ब्लीचिंग यूनिट्स को सील किया है। ये यूनिट्स भूजल और जल स्रोतों, खासकर यमुना नदी को प्रदूषित करने के आरोप में अवैध रूप से संचालित पाई गई थीं।

RTI में सामने आया चौंकाने वाला खुलासा

दिल्ली के पर्यावरण कार्यकर्ता वरुण गुलाटी द्वारा दायर RTI के जवाब में यह जानकारी सामने आई कि इन 132 यूनिट्स में से केवल 3 पर ही अब तक पर्यावरण क्षतिपूर्ति (EC) लगाई गई है। बाकी मामलों में कार्रवाई अधूरी पड़ी हुई है।

26 यूनिट्स पर EC आदेश लंबित

HSPCB के पानीपत क्षेत्रीय कार्यालय ने RTI जवाब में बताया कि 26 अवैध ब्लीचिंग यूनिट्स पर EC लगाने के आदेश अभी भी लंबित हैं। हालांकि, अब तक कितनी राशि वसूली गई है, इसकी स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है।

केवल 3 यूनिट्स पर वसूली गई EC राशि

अब तक जिन तीन यूनिट्स पर पर्यावरण क्षतिपूर्ति लगाई गई है, उनमें करहंस गांव की यूनिट पर 35.20 लाख रुपये, जट्टल की एक यूनिट पर 2.12 लाख रुपये और उसी क्षेत्र की दूसरी यूनिट पर 1.75 लाख रुपये की EC लगाई गई है।

NGT की सख्ती के बावजूद कार्रवाई धीमी

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने पहले ही इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए HSPCB को निर्देश दिया था कि 32 चिन्हित यूनिट्स से तीन महीने के भीतर EC वसूली की जाए। लेकिन RTI के अनुसार अब तक इस दिशा में पूरी कार्रवाई नहीं हो सकी है।

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यमुना प्रदूषण का गंभीर आरोप

रिपोर्ट के अनुसार ये यूनिट्स रसायनयुक्त अपशिष्ट सीधे नालों और खुले क्षेत्रों में छोड़ रही थीं, जो आगे चलकर यमुना नदी में मिल जाता है। इससे क्षेत्र में गंभीर पर्यावरणीय खतरा पैदा हो रहा है।

शिकायतों के बाद भी जारी अवैध संचालन

पर्यावरण कार्यकर्ता का आरोप है कि पिछले एक दशक में 132 यूनिट्स के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई, लेकिन 103 मामलों में अब तक EC नहीं लगाई गई है। साथ ही 62 नई अवैध यूनिट्स की शिकायत भी हाल ही में दर्ज कराई गई है, जो कई गांवों में सक्रिय हैं।

पर्यावरण निगरानी पर उठे सवाल

इस पूरे मामले ने HSPCB की निगरानी और प्रवर्तन व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्योंकि बड़ी संख्या में यूनिट्स सील होने के बावजूद पर्यावरण क्षतिपूर्ति की वसूली बेहद सीमित रही है।

 

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