पंचकूला: पंचकूला में सामने आए करीब 150 करोड़ रुपये के कथित बैंक घोटाले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने विशेष अदालत को बताया है कि मामले के मुख्य आरोपी और कोटक महिंद्रा बैंक के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट पुष्पिंदर सिंह ने घोटाले से जुड़े पैसों का इस्तेमाल बीएमडब्ल्यू 7 सीरीज समेत कई महंगी गाड़ियां और अचल संपत्तियां खरीदने में किया। जांच एजेंसी का दावा है कि घोटाले का खुलासा होने से पहले मार्च 2026 तक इन संपत्तियों और वाहनों को बेच भी दिया गया था।
इस मामले में हरियाणा राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (SV&ACB) ने 24 मार्च 2026 को एफआईआर दर्ज की थी, जिसके बाद ED ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। आरोप है कि नगर निगम पंचकूला के नाम पर दो बैंक खाते फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खोले और संचालित किए गए।
ED के अनुसार, इन खातों से बड़ी रकम अलग-अलग लोगों के खातों में ट्रांसफर की गई। जांच में सामने आया कि करीब 88.17 करोड़ रुपये रजत दहरा, 31.58 करोड़ रुपये स्वाति तोमर, 2.36 करोड़ रुपये कपिल कुमार और 1.41 करोड़ रुपये विनोद कुमार के खातों में भेजे गए।
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पूछताछ के दौरान कपिल कुमार ने बताया कि रजत दहरा ने नौकरी दिलाने का झांसा देकर उसके नाम से बैंक खाता खुलवाया और कई खाली चेकों पर हस्ताक्षर करवा लिए। वहीं स्वाति तोमर ने आरोप लगाया कि पुष्पिंदर सिंह, उनकी पत्नी प्रीति ठाकुर और रजत दहरा के कहने पर उसने विभिन्न बैंकों में खाते खुलवाए और बाद में चेकबुक, एटीएम कार्ड व अन्य बैंकिंग दस्तावेज उन्हें सौंप दिए।
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जांच एजेंसी के मुताबिक, रजत दहरा ने बयान दिया कि पुष्पिंदर सिंह ने उसे बैंक खातों के जरिए पैसों के लेन-देन और तथाकथित “एंट्री ऑपरेशन” चलाने के निर्देश दिए थे। बाद में और खाते खुलवाने के लिए अन्य लोगों को भी इस नेटवर्क में जोड़ा गया। ED का दावा है कि धन के हस्तांतरण से जुड़े निर्देश व्हाट्सएप के माध्यम से दिए जाते थे।
बीएमडब्ल्यू 7 सीरीज, महिंद्रा थार, स्कॉर्पियो-एन और इंडियन मोटरसाइकिल जैसी कई गाड़ियां रजत दहरा के नाम पर
ED ने अदालत को बताया कि बीएमडब्ल्यू 7 सीरीज, महिंद्रा थार, स्कॉर्पियो-एन और इंडियन मोटरसाइकिल जैसी कई गाड़ियां रजत दहरा के नाम पर खरीदी गईं, लेकिन उनका इस्तेमाल कथित रूप से पुष्पिंदर सिंह और उनकी पत्नी करते थे। जांच एजेंसी का आरोप है कि बाद में इन वाहनों को बेचकर मिली राशि भी पुष्पिंदर सिंह ने अपने पास रखी।
जांच के दौरान नगर निगम पंचकूला के पूर्व लेखा अधिकारी विकास कौशिक ने भी बयान दिया कि नगर निगम और बैंक के बीच होने वाले अधिकांश पत्राचार में पुष्पिंदर सिंह की भूमिका रहती थी। ED का दावा है कि कौशिक ने यह भी आरोप लगाया कि घोटाले में सहयोग के बदले उन्हें आर्थिक लाभ का प्रस्ताव दिया गया था।
एजेंसी के अनुसार, पुष्पिंदर सिंह ने स्वीकार किया है कि वर्ष 2020 से 2023 के बीच उन्हें रजत दहरा और स्वाति तोमर से लगभग 33 करोड़ रुपये ऋण के रूप में मिले थे। इसी रकम का उपयोग लग्जरी वाहन और संपत्तियां खरीदने में किया गया, जिन्हें बाद में बेच दिया गया।
ED का कहना है इससे यह साबित होता है कि पुष्पिंदर सिंह ने बैंक में अपने पद का दुरुपयोग करते हुए नगर निगम पंचकूला के नाम पर अनधिकृत खाते खुलवाने, सरकारी धन को अन्य खातों में ट्रांसफर कराने और कई स्तरों पर धन के लेन-देन को छिपाने की कोशिश की।
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान पुष्पिंदर सिंह की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उनकी गिरफ्तारी और रिमांड प्रक्रिया कानून के अनुरूप नहीं है। हालांकि अदालत ने ED की दलीलों को सुनने के बाद उन्हें 9 जून तक एजेंसी की हिरासत में भेज दिया, ताकि कथित घोटाले के लाभार्थियों और धन के अंतिम उपयोग की पूरी जानकारी जुटाई जा सके।
नगर निगम पंचकूला के खातों से कथित रूप से भेजी गई राशि
- रजत दहरा – 88.17 करोड़ रुपये
- स्वाति तोमर – 31.58 करोड़ रुपये
- कपिल कुमार – 2.36 करोड़ रुपये
- विनोद कुमार – 1.41 करोड़ रुपये






