Haryana-Punjab Weather Update: पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में लोग इन दिनों अजीब मौसम का सामना कर रहे हैं। दिन में पारा 39 से 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच रहा है, जबकि शाम को आंधी और हल्की बारिश के बाद तापमान कुछ डिग्री गिर जाता है। लेकिन अगले ही दिन फिर वही तपती गर्मी लौट आती है। इसकी सबसे बड़ी वजह है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून अब तक उत्तर भारत के इन इलाकों में नहीं पहुंचा है।
मानसून में कितनी देरी?
आमतौर पर मानसून जून के आखिरी सप्ताह में पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ पहुंच जाता है। हालांकि, इस बार इसकी रफ्तार धीमी पड़ गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार हरियाणा में मानसून 26 जून से 1 जुलाई के बीच पहुंच सकता है। पंजाब में मानसून 27 जून से 3 जुलाई के बीच दस्तक दे सकता है।
बारिश का बड़ा घाटा
1 जून से 24 जून के बीच चंडीगढ़ में सामान्य 97.1 मिमी के मुकाबले सिर्फ 39.3 मिमी बारिश हुई, यानी 60 फीसदी की कमी। पंजाब में बारिश 25 फीसदी कम रही। हरियाणा में 16 फीसदी की कमी दर्ज की गई। पूरे देश में जून के दौरान बारिश सामान्य से 46 फीसदी कम रही। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि जून 2026 पिछले एक सदी के सबसे शुष्क जून महीनों में से एक हो सकता है।
आम लोगों और किसानों पर असर
मानसून की देरी का असर लगभग हर वर्ग पर पड़ रहा है। भीषण गर्मी से बुजुर्ग, बच्चे और बिना एयर कंडीशनर वाले घरों में रहने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। दिहाड़ी मजदूरों और बाहर काम करने वाले लोगों के लिए हालात मुश्किल बने हुए हैं। किसानों के लिए यह स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है, क्योंकि धान, मक्का, ज्वार और पशुओं के चारे जैसी खरीफ फसलें समय पर बारिश पर निर्भर करती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून में हर सप्ताह की देरी बुवाई की अवधि को कम कर देती है, जिससे उत्पादन पर असर पड़ सकता है और सिंचाई की लागत बढ़ सकती है।
क्यों थम गया मानसून?
मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक इस बार पांच प्रमुख कारण मानसून की रफ्तार रोक रहे हैं।
- अल नीनो का प्रभाव
प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति विकसित हो रही है, जिससे मानसूनी हवाओं की ताकत कमजोर पड़ रही है।
- पश्चिमी विक्षोभ
जून के पहले 17 दिनों में पांच पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहे। इनसे कुछ जगहों पर बारिश तो हुई, लेकिन इनके कारण बनी शुष्क हवाओं ने मानसून की प्रगति को धीमा कर दिया।
- कमजोर मैडन-जूलियन ऑसिलेशन (MJO)
यह एक वैश्विक मौसम प्रणाली है, जो बारिश की गतिविधियों को प्रभावित करती है। इस बार इसकी सक्रियता कमजोर रही।
- कमजोर सोमाली जेट
सोमाली जेट अरब सागर से नमी लेकर भारत की ओर आने वाली हवाओं को मजबूत करता है, लेकिन इस बार इसकी ताकत कम रही।
- बंगाल की खाड़ी में कम दबाव वाले सिस्टम का अभाव
आमतौर पर बंगाल की खाड़ी में बनने वाले निम्न दबाव के क्षेत्र मानसून को उत्तर भारत की ओर खींचते हैं, लेकिन इस बार ऐसे सिस्टम नहीं बने।
फिलहाल क्या है स्थिति?
हाल के दिनों में चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला में हुई हल्की बारिश और आंधियां सिर्फ प्री-मानसून गतिविधियां हैं, इन्हें मानसून की शुरुआत नहीं माना जा सकता। मौसम विभाग का कहना है कि अगले कुछ दिनों में उत्तर भारत में मानसून के पहुंचने की संभावना है, लेकिन तब तक लोगों को भीषण गर्मी और उमस का सामना करना पड़ सकता है।
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आगे क्या?
विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यों को जल प्रबंधन की तैयारी तेज करनी चाहिए। किसानों के लिए वैकल्पिक फसलों और सिंचाई योजनाओं पर काम करने की जरूरत है। शहरों में हीट एक्शन प्लान को प्रभावी ढंग से लागू करना होगा। हालांकि मानसून जल्द पहुंच सकता है, लेकिन जून में बारिश की भारी कमी और अल नीनो के बढ़ते प्रभाव के कारण आने वाले महीनों में भी मौसम की अनिश्चितता बनी रह सकती है।






