हरियाणा के स्कूलों में 16 हजार से ज्यादा शिक्षक पद खाली, पढ़ाई पर बढ़ा संकट

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Severe shortage of teachers in Haryana government schools: हरियाणा के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी लगातार बढ़ती जा रही है। सबसे चिंताजनक स्थिति सीनियर सेकेंडरी स्तर की है, जहां 11वीं और 12वीं कक्षाओं में स्वीकृत शिक्षकों के 26 फीसदी से अधिक पद खाली पड़े हैं। इसका असर छात्रों की पढ़ाई और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

11वीं-12वीं में 5,573 पद खाली

समग्र शिक्षा के वार्षिक कार्य योजना एवं बजट (AWP&B) 2026-27 को लेकर हुई प्रोजेक्ट अप्रूवल बोर्ड (PAB) की बैठक के मिनट्स के अनुसार, सीनियर सेकेंडरी स्तर पर कुल 21,311 स्वीकृत पदों में से 5,573 पद खाली हैं। यानी हर चार पदों में से एक पद पर शिक्षक नहीं है। वहीं, प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 8) में 60,396 स्वीकृत पदों में से 8,449 पद खाली हैं, जिससे रिक्तियों की दर 14 फीसदी है। इसी तरह माध्यमिक स्तर (कक्षा 9 और 10) में 19,792 पदों में से 2,413 पद खाली हैं।

968 स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि राज्य में केवल एक शिक्षक वाले सरकारी प्राथमिक स्कूलों की संख्या एक साल में 696 से बढ़कर 968 हो गई है। यह राज्य के करीब 11 फीसदी सरकारी प्राथमिक स्कूल हैं। इसके अलावा, जिन स्कूलों में छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है, उनकी संख्या भी बढ़ी है। 2023-24 में यह आंकड़ा 21.5 फीसदी था, जो अब बढ़कर 22.1 फीसदी हो गया है।

शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों में भी भारी कमी

राज्य के 21 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIET) में 62 फीसदी पद खाली हैं। वहीं, राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (SCERT) में शैक्षणिक पदों की रिक्ति दर 33 फीसदी है। बैठक में अधिकारियों ने राज्य सरकार को योग्य शिक्षकों और शिक्षक प्रशिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने की सलाह दी है।

सैकड़ों गांवों में स्कूलों की पहुंच नहीं

राज्य के 63 ऐसे क्षेत्र हैं जहां प्राथमिक स्कूलों की पहुंच नहीं है। इसके अलावा 112 क्षेत्रों में उच्च प्राथमिक, 132 गांवों में माध्यमिक और 215 गांवों में उच्च माध्यमिक स्कूल उपलब्ध नहीं हैं।

विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा पर चिंता

राज्य में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) का नामांकन कुल छात्रों का केवल 0.37 फीसदी है, जो तय मानकों से काफी कम है। इसके अलावा केवल 6 फीसदी शिक्षकों को समावेशी शिक्षा का प्रशिक्षण मिला है।

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3.44 लाख बच्चे स्कूल से बाहर

पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के आंकड़ों के अनुसार, 14 से 18 वर्ष आयु वर्ग के करीब 3.44 लाख बच्चे स्कूल से बाहर हैं। हालांकि, राज्य सरकार ने 2026-27 की योजना में केवल 2,000 ड्रॉपआउट बच्चों को ओपन स्कूलिंग से जोड़ने का प्रस्ताव दिया है।

691 करोड़ रुपये की परियोजनाएं अब भी अधूरी

रिपोर्ट के अनुसार, पिछले वर्षों की 691.88 करोड़ रुपये की परियोजनाएं अब तक लंबित हैं। स्वीकृत 887.71 करोड़ रुपये में से केवल 195.82 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए हैं। कई निर्माण कार्य अभी तक शुरू भी नहीं हो पाए हैं। बैठक में राज्य सरकार को जल्द से जल्द लंबित कार्य पूरे करने और शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया में तेजी लाने की सलाह दी गई है।

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