Modi Cabinet Reshuffle: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्रा से लौटने के बाद केंद्र सरकार में बड़े कैबिनेट फेरबदल की चर्चा तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल में बदलाव का ऐलान हो सकता है, हालांकि सरकार की ओर से अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। लोकसभा चुनाव 2024 के बाद यह मोदी सरकार का पहला बड़ा कैबिनेट विस्तार और फेरबदल माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में खासतौर पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, उन्हें मंत्रिमंडल में बरकरार रखा जाएगा, नई जिम्मेदारी दी जाएगी या बाहर किया जाएगा, इस पर अभी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं है।
किन नेताओं को मिल सकती है मंत्रिमंडल में जगह?
रिपोर्ट्स के अनुसार, हाल के राजनीतिक घटनाक्रम के बाद एनडीए को समर्थन देने वाले कुछ दलों के नेताओं को मंत्रिमंडल में शामिल किया जा सकता है। इनमें तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव गुट) और आम आदमी पार्टी से जुड़े कुछ सांसदों के नाम चर्चा में हैं। संभावित नए चेहरों में भाजपा सांसद अरुण गोविल, शिवसेना सांसद श्रीकांत शिंदे, पूर्व आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, संजय दीना पाटिल, वीडी शर्मा, तरुण चुघ और राघव चड्ढा के नाम सामने आ रहे हैं। हालांकि, इन नामों पर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
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किन मंत्रियों की जिम्मेदारी बदल सकती है?
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, धर्मेंद्र प्रधान, रवनीत सिंह बिट्टू और हरदीप सिंह पुरी के मंत्रालयों में बदलाव हो सकता है या उन्हें नई जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं। इसके अलावा, राज्यसभा सदस्य बीएल वर्मा का कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है, इसलिए उनके भविष्य को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। करीब छह राज्य मंत्रियों में भी बदलाव की संभावना जताई जा रही है। वहीं, मनोहर लाल खट्टर और निर्मला सीतारमण के मंत्रालयों में फेरबदल की चर्चाएं भी चल रही हैं, लेकिन सरकार ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
अभी क्यों अहम माना जा रहा है यह फेरबदल?
कैबिनेट फेरबदल का समय इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 18 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी का अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम भी काफी व्यस्त रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार प्रमुख मंत्रालयों में नए चेहरों को मौका देने के साथ-साथ क्षेत्रीय, सामाजिक और राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की रणनीति पर काम कर रही है। माना जा रहा है कि यह फेरबदल आगामी संसद सत्र और राजनीतिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर किया जा सकता है।






