India’s first hydrogen train launch: भारत ने रेलवे के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को हरियाणा के जींद रेलवे स्टेशन से देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस ट्रेन के शुरू होने के साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जहां स्वच्छ और हरित ईंधन से चलने वाली ट्रेनों का संचालन हो रहा है। रेल मंत्रालय के अनुसार, इस ट्रेन को चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) ने विकसित किया है। फिलहाल इसे हरियाणा के जींद-सोनीपत रेलखंड पर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चलाया जाएगा।
89 किलोमीटर के रूट पर चलेगी ट्रेन
हाइड्रोजन ट्रेन उत्तरी रेलवे के दिल्ली मंडल के अंतर्गत आने वाले 89 किलोमीटर लंबे जींद-सोनीपत रूट पर चलेगी। यह ट्रेन जींद जंक्शन, गोहाना जंक्शन और सोनीपत को जोड़ते हुए कुल 12 स्टेशनों पर रुकेगी।
इन स्टेशनों पर होगा ठहराव:
- जींद सिटी
- पांडू पिंडारा
- ललित खेड़ा
- भांभेवा
- ईशापुर खेड़ी
- बुटाना
- खंडराई
- गोहाना
- राभड़ा
- लाठ
- मोहाना हरियाणा
- बरवासनी
क्या है ट्रेन का समय?
- ट्रेन संख्या 74010 (जींद- सोनीपत) सुबह 7:40 बजे जींद से रवाना होगी और 9:40 बजे सोनीपत पहुंचेगी।
- ट्रेन संख्या 74009 (सोनीपत- जींद) सुबह 10:40 बजे सोनीपत से चलेगी और दोपहर 1:00 बजे जींद पहुंचेगी।
यह ट्रेन सप्ताह के सभी दिनों में संचालित होगी।
कितनी होगी स्पीड?
हाइड्रोजन ट्रेन की अधिकतम परिचालन गति 75 किमी प्रति घंटा है, जबकि इसकी डिजाइन स्पीड 110 किमी प्रति घंटा रखी गई है। इस 10 कोच वाली ट्रेन में 2 ड्राइविंग पावर कार (DPC) और 8 यात्री कोच शामिल हैं। दोनों पावर कार की क्षमता 1,200-1,200 किलोवाट है, यानी ट्रेन की कुल शक्ति 2,400 किलोवाट है।
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कैसे काम करती है हाइड्रोजन ट्रेन?
यह ट्रेन पारंपरिक इलेक्ट्रिक ट्रेनों की तरह ओवरहेड बिजली लाइन से बिजली नहीं लेती। इसमें लगे हाइड्रोजन फ्यूल सेल हाइड्रोजन और हवा में मौजूद ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रक्रिया से बिजली पैदा करते हैं। इसी बिजली से ट्रेन चलती है। इस प्रक्रिया में धुआं या कार्बन उत्सर्जन नहीं होता। इसका एकमात्र उप-उत्पाद पानी (वॉटर वेपर) और थोड़ी गर्मी होती है। यही वजह है कि इसे पर्यावरण के लिए बेहद अनुकूल परिवहन माना जा रहा है।
सुरक्षा के लिए कई आधुनिक फीचर
रेल मंत्रालय के अनुसार, ट्रेन में मल्टी-लेयर सेफ्टी सिस्टम लगाए गए हैं, जो हाइड्रोजन गैस के रिसाव, अत्यधिक गर्मी, आग और धुएं का तुरंत पता लगा सकते हैं। इसके अलावा जींद में स्वदेशी हाइड्रोजन स्टोरेज और रिफ्यूलिंग स्टेशन भी तैयार किया गया है, जिसे पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO) से मंजूरी मिल चुकी है।
दुनिया के चुनिंदा देशों में शामिल हुआ भारत
हाइड्रोजन ट्रेन शुरू होने के साथ भारत जर्मनी, जापान, चीन और अमेरिका जैसे देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है, जहां हाइड्रोजन तकनीक पर आधारित ट्रेनों का परीक्षण या संचालन किया जा रहा है। भारत की यह पहल रेलवे को स्वच्छ, आधुनिक और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।






