हरियाणा में व्यापारिक और औद्योगिक गतिविधियों के लिए बिजली निगम पर निर्भर रहने वाले उपभोक्ताओं को बड़ा झटका लगा है। बिजली नियामक आयोग की ओर से उन्हें इस बार कोई राहत नहीं मिली है। आयोग की उस मांग को खारिज कर दिया गया है जिसमें इंडस्ट्री से वसूल किए जाने वाले अत्यधिक फिक्स्ड चार्ज को कम करने के लिए कहा गया था।
कम खपत के बाद भी अधिक चार्ज
औद्योगिक उपभोक्ताओं की ओर से आपत्ति दर्ज करते हुए कहा गया था कि औद्योगिक इकाइयों से फिक्सड चार्ज बहुत अधिक वसूला जा रहा है। कुछ मामलों में तो यह चार्ज 290 रुपए के.वी.ए. के हिसाब से जोड़कर बिल में भेजा जा रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि कम खपत के बाद भी उनको अधिक चार्ज देना पड़ रहा है। इसके कारण उत्पादन लागत बढ़ रही है और उद्योगों की प्रतिस्पर्धा पर बुरा असर पड़ रहा है। इसलिए फिक्स्ड चार्ज को कम करने की मांग की गई थी लेकिन बिजली नियामक आयोग की ओर से इसे ठुकरा दिया गया है।
घाटे की भरपाई के लिए चार्ज जरूरी
बिजली निगम आयोग का कहना है कि यह उस पूरे नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर, क्षमता निर्माण और रखरखाव की लागत है जो इंडस्ट्री को 24 घंटे विश्वसनीय बिजली देने के लिए तैयार किया गया है। आयोग ने कहा कि यह खर्च ‘अनिवार्य प्रकृति’ का है और ऊर्जा की खपत कम हो या ज्यादा, सिस्टम को चालू रखने के लिए यह पैसा जरूरी है।
आखिरी बार वित्त वर्ष 2015-16 में संशोधन
आयोग ने कहा कि औद्योगिक उपभोक्ताओं पर लागू फिक्स्ड चार्ज में आखिरी बार वित्त वर्ष 2015-16 में संशोधन किया गया था और आपूर्ति लागत में लगातार बढ़ोतरी के बाद भी 7 सालों तक कोई परिवर्तन नहीं हुआ। आयोग का मानना है कि टैरिफ स्थिरता की लंबी अवधि के कारण वित्त वर्ष 2025-26 में 3,262 करोड़ रुपए के राजस्व घाटे को पूरा करने के लिए एक पुनर्समायोजन की आवश्यकता थी। फिक्स्ड चार्ज इंफ्रास्ट्रक्चर लागतों की वसूली के लिए बहुत जरूरी है।
हाईलाइट्स:
- हरियाणा में औद्योगिक उपभोक्ताओं को नहीं मिली कोई राहत
- बिजली नियामक आयोग ने फिक्स्ड चार्ज घटाने की मांग ठुकराई
- कम खपत के बावजूद उद्योगों को देना पड़ रहा ज्यादा बिल
- कुछ मामलों में 290 रुपये प्रति KVA तक वसूला जा रहा चार्ज
- बढ़ती लागत से उद्योगों की प्रतिस्पर्धा पर पड़ रहा असर
- आयोग ने बताया—इंफ्रास्ट्रक्चर और मेंटेनेंस के लिए चार्ज जरूरी
- 24 घंटे बिजली आपूर्ति बनाए रखने के लिए फिक्स्ड चार्ज अनिवार्य
- आखिरी बार 2015-16 में हुआ था चार्ज में संशोधन
- 2025-26 में 3,262 करोड़ रुपये के राजस्व घाटे को पूरा करने की जरूरत
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