हरियाणा में बढ़े तारकोल के दाम, सड़क परियोजनाएं प्रभावित

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ईरान और इजरायल युद्ध का असर हरियाणा में देखने को मिल रहा है। तारकोल (बिटुमेन) की बढ़ती कीमत ने ठेकेदारों की मुश्किलें बढ़ा दी है जिसके कारण सड़क परियोजनाएं थम गई है। हजारों मजदूरों के कामगाज पर संकट खड़ा हो गया है। प्रदेश में सड़क निर्माण कार्य पूरी तरह से ठप हो गया है।

 76 हजार रुपये प्रति टन पहुंची तारकोल की कीमत

इससे पहले जो तारकोल 42 हजार रुपये प्रति टन के आसपास उपलब्ध था। वही अब बढ़कर 76 हजार रुपये प्रति टन (रिफाइनरी रेट) तक पहुंच गया है। इस बढ़ोतरी ने निर्माण लागत दोगुनी कर दी है। ऐसे में ठेकेदार पुराने टेंडर रेट पर कार्य करने में पूरी तरह से असमर्थ हो गए हैं। हरियाणा के करीब 250 ठेकेदारों ने काम बंद कर दिया है, जिसके कारण 37 हजार मजदूर और उनके परिवार पर बेरोजगारी के संकट के बादल छा गए हैं।

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निर्माण स्थलों पर पसरा सन्नाटा

निर्माण स्थलों पर सन्नाटा पसरा हुआ है जिससे विकास की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है। प्रदेश में 400 किलोमीटर की ऐसी सड़कें हैं जो एक गांव को दूसरे गांव से जोड़ती है। इसी तरह 200 किलोमीटर के स्टेट या एमडीआर की सड़कें हैं जिसका नाम रुका हुआ है। ठेकेदारों का कहना है कि उन्होंने जिन दरों पर टेंडर लिए थे, वे अब पूरी तरह अप्रासंगिक हो चुके हैं। बढ़ती लागत और स्थिर भुगतान व्यवस्था के बीच काम करना घाटे का सौदा बन गया है।

हाइलाइट्स (Highlights):

  • ईरान-इजरायल युद्ध का असर हरियाणा तक, तारकोल महंगा होने से सड़क निर्माण ठप
  • बिटुमेन की कीमत 42 हजार से बढ़कर 76 हजार रुपये प्रति टन पहुंची
  • बढ़ती लागत से ठेकेदारों ने रोका काम, पुराने टेंडर रेट हुए अप्रासंगिक
  • प्रदेश के करीब 250 ठेकेदारों ने काम किया बंद
  • 37 हजार मजदूरों और उनके परिवार पर रोजगार का संकट
  • निर्माण स्थलों पर पसरा सन्नाटा, विकास कार्यों की रफ्तार थमी
  • 400 किमी ग्रामीण सड़कें और 200 किमी स्टेट/MDR सड़कें प्रभावित
  • लागत बढ़ने और भुगतान स्थिर रहने से ठेकेदारों को हो रहा भारी नुकसान

 

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Author: vandana

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