चंडीगढ़ के ‘ब्रूम वॉरियर’ इंदरजीत सिंह सिद्धू को पद्मश्री, 30 साल से खुद साफ कर रहे सड़कें

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Broom warrior IPS officer Inderjit Singh Sidhu Padma Shri : चंडीगढ़ के लिए गर्व के क्षण में पंजाब कैडर के सेवानिवृत्त IPS अधिकारी इंद्रजीत सिंह सिद्धू को सामाजिक कार्य के क्षेत्र में उनके असाधारण योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित दूसरे नागरिक अलंकरण समारोह में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया। 88 वर्षीय सिद्धू को चंडीगढ़ में लोग प्यार से ‘ब्रूम वॉरियर’ (झाड़ू योद्धा) के नाम से जानते हैं। उन्होंने वर्ष 1996 में पुलिस सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद अपना जीवन स्वच्छता और सामाजिक जागरूकता को समर्पित कर दिया।

रिटायरमेंट के बाद शुरू किया स्वच्छता अभियान

पंजाब के संगरूर जिले में 6 जून 1938 को जन्मे इंदरजीत सिंह सिद्धू ने 1961 में पंजाब पुलिस में सेवा शुरू की थी। उत्कृष्ट सेवाओं के लिए उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक भी मिल चुका है। सेवानिवृत्ति के बाद जब वे चंडीगढ़ में रहने लगे तो शहर में फैली गंदगी देखकर परेशान हुए। इसके बाद उन्होंने खुद सड़कों, पार्कों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई शुरू कर दी। धीरे-धीरे यह उनका दैनिक मिशन बन गया।

रोज सुबह साइकिल ठेले के साथ निकलते हैं

करीब तीन दशक से सिद्धू हर सुबह साइकिल ठेला लेकर निकलते हैं और सार्वजनिक स्थानों पर फैला कचरा अपने हाथों से उठाकर उसका उचित निपटान करते हैं। उन्होंने यह काम उस समय शुरू किया था जब देश में स्वच्छता अभियान जैसी कोई बड़ी पहल नहीं थी।

गुरु नानक की शिक्षाओं से मिली प्रेरणा

सिद्धू का मानना है कि धरती को स्वच्छ रखना हर व्यक्ति का नैतिक कर्तव्य है। वे अक्सर गुरु नानक देव की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहते हैं कि हवा गुरु, पानी पिता और धरती माता है। यदि कोई अपनी मां को गंदा करता है तो उससे बुरा कोई नहीं हो सकता।

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पहले उड़ाया गया मजाक, अब बन गए प्रेरणा

एक समय ऐसा भी था जब वरिष्ठ पुलिस अधिकारी रह चुके सिद्धू को सड़क पर झाड़ू लगाते देखकर लोग उनका मजाक उड़ाते थे। लेकिन उन्होंने कभी इसकी परवाह नहीं की और अपने अभियान को जारी रखा। समय के साथ उनके प्रयासों ने लोगों की सोच बदली। स्थानीय निवासी भी सार्वजनिक स्थानों की सफाई के प्रति जागरूक होने लगे। सोशल मीडिया पर उनके वीडियो वायरल होने के बाद देशभर में उनकी सराहना हुई।

उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी की तारीफ

प्रसिद्ध उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी इंदरजीत सिंह सिद्धू की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा की थी और उन्हें अनुशासन, सेवा और उद्देश्य का प्रतीक बताया था।

‘यह सम्मान मेरा नहीं, एक संदेश है’

पद्मश्री मिलने के बाद भी सिद्धू इसे अपनी व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं मानते। उनका कहना है कि वह लोगों को यह संदेश देना चाहते हैं कि उम्र चाहे कितनी भी हो, समाज के लिए काम किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “मैं सड़कों की सफाई इसलिए करता हूं ताकि लोग देखें कि इस उम्र में भी एक व्यक्ति अपने हाथों से काम कर रहा है। हम सभी को इस अभियान से जुड़ना चाहिए।”

राज्यपाल ने भी दी बधाई

पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाबचंद कटारिया ने भी इस सम्मान का स्वागत करते हुए कहा कि यह उस नागरिक के प्रति देश की ओर से उचित सम्मान है, जिसने यह साबित किया कि सार्वजनिक सेवा रिटायरमेंट के बाद भी समाप्त नहीं होती। पद्मश्री सम्मान के साथ चंडीगढ़ के इस ‘झाड़ू योद्धा’ ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि समाज में बड़ा बदलाव लाने के लिए किसी पद या अधिकार की नहीं, बल्कि व्यक्तिगत पहल और समर्पण की जरूरत होती है।

 

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