Swachh Evam Harit Vidyalaya Rating: पंजाब स्कूल शिक्षा विभाग ने राज्य के सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों के लिए स्वच्छ एवं हरित विद्यालय रेटिंग (SHVR) कार्यक्रम को शैक्षणिक सत्र 2026-27 से अनिवार्य रूप से लागू करने के निर्देश जारी किए हैं। इस संबंध में महानिदेशक स्कूल शिक्षा (DGSE) कार्यालय ने विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
1 अगस्त से शुरू होगा पंजीकरण
शिक्षा विभाग के अनुसार, SHVR पोर्टल और मोबाइल ऐप 1 अगस्त 2026 से शुरू होंगे। इसके माध्यम से स्कूल ऑनलाइन पंजीकरण और स्वयं मूल्यांकन (Self Assessment) कर सकेंगे। कार्यक्रम को लागू करने के लिए NCERT और UNICEF के सहयोग से राष्ट्रीय स्तर पर ओरिएंटेशन वर्कशॉप भी आयोजित की जाएंगी।
6 मानकों पर होगी स्कूलों की रेटिंग
स्कूलों का मूल्यांकन छह प्रमुख मानकों के आधार पर किया जाएगा—
- स्वच्छ पेयजल
- शौचालय की व्यवस्था
- साबुन से हाथ धोने की सुविधा
- संचालन एवं रखरखाव
- व्यवहार परिवर्तन और क्षमता निर्माण
- मिशन लाइफ (Mission LiFE) से जुड़ी गतिविधियां
दो श्रेणियों में होंगे स्कूल
SHVR कार्यक्रम के तहत स्कूलों को दो श्रेणियों में बांटा गया है-
- कैटेगरी-I: प्री-प्राइमरी से कक्षा 8 तक
- कैटेगरी-II: कक्षा 9 से 12 तक
जिला स्तर पर चयनित स्कूलों को राज्य स्तर पर भेजा जाएगा। इसके बाद राज्य से 20 स्कूलों का चयन राष्ट्रीय स्तर के लिए होगा। अंतिम चरण में देशभर से 200 स्कूलों को सम्मानित किया जाएगा।
ये भी पढ़ें- NEET पेपर लीक पर AAP का BJP के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन, आज पूरे पंजाब में बजेगी थाली
राष्ट्रीय स्तर पर मिलेगा 1 लाख रुपये का पुरस्कार
राष्ट्रीय स्तर पर चयनित स्कूलों को 1 लाख रुपये का समेकित स्कूल अनुदान (Composite School Grant) दिया जाएगा। इसके अलावा चयनित स्कूलों के प्रधानाचार्यों को तीन दिवसीय अध्ययन भ्रमण (Exposure Visit) पर भी भेजा जाएगा।
दिसंबर तक पूरी होगी राज्य स्तरीय प्रक्रिया
ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया 1 अगस्त से दो महीने तक चलेगी। जिला स्तर का मूल्यांकन अक्टूबर के अंत तक और राज्य स्तर का मूल्यांकन दिसंबर के पहले सप्ताह तक पूरा किया जाएगा। इसके बाद दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 के बीच राष्ट्रीय स्तर पर सत्यापन होगा।
स्वच्छता और पर्यावरण जागरूकता को मिलेगा बढ़ावा
इस पहल का उद्देश्य स्कूलों में स्वच्छता, सुरक्षित वातावरण, पर्यावरण संरक्षण और विद्यार्थियों में बेहतर व्यवहार संबंधी आदतों को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम के संचालन और निगरानी के लिए राज्य, जिला, ब्लॉक और स्कूल स्तर पर समितियां भी गठित की गई हैं।






