Haryana rolls out regularization policy: हरियाणा सरकार ने राज्य की अनधिकृत औद्योगिक कॉलोनियों में संचालित हजारों औद्योगिक इकाइयों को बड़ी राहत देते हुए उनके नियमितीकरण (रेगुलराइजेशन) के लिए नई नीति जारी की है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग (TCPD) ने 17 जुलाई को इस संबंध में विस्तृत नीति ढांचा जारी किया।
नई नीति के तहत ऐसी औद्योगिक कॉलोनियां नियमितीकरण के लिए पात्र होंगी, जो कम से कम 10 एकड़ के लगातार क्षेत्र में फैली हों, जिनमें न्यूनतम 50 औद्योगिक इकाइयां हों और जिनका निर्माण 3 अक्टूबर 2025 से पहले किया गया हो।
ऑनलाइन करना होगा आवेदन
सरकार ने पहली बार ‘अधिकृत व्यक्ति’ (Authorised Person) की व्यवस्था लागू की है। यह व्यक्ति संबंधित औद्योगिक कॉलोनी के उद्यमियों और उद्योगों की ओर से नियमितीकरण के लिए आवेदन कर सकेगा। आवेदन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से करना होगा। इसके साथ लेआउट प्लान, सर्वे मैप, स्वामित्व संबंधी दस्तावेज, उत्पादन का प्रमाण, लीज दस्तावेज (जहां लागू हो) तथा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति, फायर एनओसी और फैक्ट्री लाइसेंस जैसे आवश्यक दस्तावेज भी जमा करने होंगे।
दो चरणों में होगी जांच
ऑनलाइन आवेदन सबसे पहले उद्योग निदेशक के पास प्रारंभिक जांच के लिए भेजा जाएगा। दस्तावेज सही पाए जाने पर आवेदन स्वीकार कर लिया जाएगा और आवेदक को हार्ड कॉपी जिला स्तरीय जांच समिति (District Level Scrutiny Committee) के समक्ष जमा करनी होगी। यदि दस्तावेजों में कोई कमी पाई जाती है, तो आवेदन वापस कर दिया जाएगा। कमियां दूर करने के बाद आवेदक को दोबारा ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
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बजट घोषणा के बाद लिया गया फैसला
हरियाणा सरकार ने वर्ष 2021 में नगर सीमा से बाहर बुनियादी सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों के विकास के लिए विशेष कानून बनाया था। इसके तहत 2022 में नीति लागू की गई और 2023 में कुछ प्रावधानों में राहत दी गई थी, लेकिन ये छूट औद्योगिक कॉलोनियों पर लागू नहीं थी। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बजट 2025 में अनधिकृत औद्योगिक इकाइयों को भी राहत देने की घोषणा की थी। इसके बाद सरकार ने हरियाणा मैनेजमेंट ऑफ सिविक एमेनिटीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेफिशिएंट एरियाज (स्पेशल प्रोविजन्स) संशोधन अधिनियम, 2025 लागू किया, जिसके आधार पर अब यह नई नीति जारी की गई है।
उद्योगों को मिलेगा बड़ा फायदा
नई नीति लागू होने से अनधिकृत औद्योगिक कॉलोनियों को नियमित दर्जा मिलने का रास्ता साफ होगा। इसके बाद इन क्षेत्रों में सड़क, बिजली, पानी, सीवरेज और अन्य बुनियादी नागरिक सुविधाओं का विकास आसान होगा, जिससे उद्योगों के संचालन और निवेश को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।






